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लाल ध्वजा लहराये रे, मैया तोरी ऊंची पहड़ियान (Lal Dhwaja Lahraye Re Maiya Teri Unchi Pahadiya)

लाल ध्वजा लहराये रे,

मैया तोरी ऊंची पहड़िया ॥


लोंग इलायची के बीड़ा लगाए,

चम्पा चमेली के हार बनाये,

लाल अनार चड़ाए रे,

मैया तोरी ऊंची पहड़िया ॥


लाल गुलाल से लाल भये है,

लाल तुम्हारे निहाल भये है,

मैया के रंग रंग आये रे,

मैया तोरी ऊंची पहड़िया ॥


‘पदम्’ सुमर मैया तोरे जस गाये,

चरणों मे तोरे शीश झुकाये,

गीत सुमन बरसाए रे,

मैया तोरी ऊंची पहड़िया ॥


लाल ध्वजा लहराये रे,

मैया तोरी ऊंची पहड़िया ॥

शिव शंकर डमरू धारी, है जग के आधार (Shiv Shankar Damru Dhari Hai Jag Ke Aadhar)

शिव शंकर डमरू धारी,
है जग के आधार,

मेरे घर राम आये है (Mere Ghar Ram Aaye Hai)

मेरी चौखट पे चलके आज,
चारों धाम आए है,

फुलेरा दूज की कथा

फुलेरा दूज हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण त्योहार है, जो भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को समर्पित होता है। इस दिन को उत्तरी राज्य खासकर ब्रज क्षेत्र में उत्साहपूर्वक मनाया जाता है।

फाल्गुन में देवताओं की पूजा

माघ पूर्णिमा के बाद फाल्गुन माह की शुरुआत होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह हिंदू वर्ष का अंतिम महीना होता है। इसके उपरांत हिन्दू नववर्ष आ जाएगा। फाल्गुन के महीने को फागुन का महीना भी कहा जाता है।