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महाकाल की लगन: शिव (Mahakal Ki Lagan)

मोहे लागी रे लगन महाकाल की लगन,

तुम्हारे नाम से किस्मत मेरी सजा लू मैं,

तुम्हारे चरणों को ही अपना घर बना लू मैं,

मुझे कर गई मगन,

महाकाल की लगन ॥


मेरी लगन सहारा बन मुझे संभालेगी ,

मेरी बलाए मेरे दुख लगन ही टालेगी ,

मेरी लगन मेरी भक्ति का ये सिला देगी,

मेरे महाकाल से मुझको भी ये मिला देगी ,

दे गई दीवानापन,

महाकाल की लगन,

मोहे लागी रे लगन ॥


आता हूं दर तेरे पल भर के लिए ,

थोड़ा अपने लिए थोड़ा घर के लिए ,

अपनी किस्मत पर तेरी नजर के लिए ,

सामने तेरे दुनिया को भूल जाऊ में,

तेरा हो जाता हु उम्र भर के लिए ,

बदल गया ये जीवन,

महाकाल की लगन,

मोहे लागी रे लगन ॥


मैं धूल बनके तेरी राह में बिखर जाऊं ,

मैं फूल बनके तेरी राह में बिखर जाऊं,

रहू मैं पास तेरे भक्ति ऐसी कर जाऊं,

तेरे चरणों से लगके भोले मैं भी तर जाऊं,

भक्तिमय करे है मन,

महाकाल की लगन,

मोहे लागी रे लगन ॥

षटतिला एकादशी पर ना करें ये काम

षटतिला एकादशी भगवान विष्णु जी को समर्पित है। हर साल माघ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ही षटतिला एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु की आराधना करने से पापों से मुक्ति मिलती है।

भीष्म पितामह का अंतिम संस्कार

माघ मास में शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भीष्म द्वादशी कहते हैं। इसे तिल द्वादशी भी कहते हैं। भीष्म द्वादशी को माघ शुक्ल द्वादशी नाम से भी जाना जाता है।

श्री ब्रह्मा चालीसा (Shri Brahma Chalisa)

जय ब्रह्मा जय स्वयम्भू, चतुरानन सुखमूल।
करहु कृपा निज दास पै, रहहु सदा अनुकूल।

षटतिला एकादशी पूजा विधि

हर साल माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी व्रत रखा जाता है। इस साल ये व्रत 25 जनवरी, 2025 को रखा जाएगा । इस दिन सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है।

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