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ओ मेरे बाबा भोलेंनाथ (O Mere Baba Bholenath)

ना मांगू मैं हीरे मोती,

ना मांगू मैं सोना चांदी,

मांगू तो बस तेरा साथ,

ओ मेरे बाबा भोलेनाथ,

ओ मेरे बाबा भोलेंनाथ ॥


उगता रहे यूँ ही सूरज तेरा,

तेरे बिना ना हो मेरा सवेरा,

तू ही तो है सब कुछ मेरा,

तेरे बिना नही कोई मेरा,

मुझे ले चल तू अपने साथ,

ओ मेरे बाबा भोलेंनाथ ॥


मार्कण्डेय के गले में पड़ा जब,

काल का पहरा,

भोले शंकर ने प्रकट होकर,

उस काल को घेरा,

नंदी को तूने मौत से बचाया,

मौत से बचाकर गण अपना बनाया,

रख मेरे भी सर पर भी हाथ,

ओ मेरे बाबा भोलेंनाथ ॥


कालो के काल शम्भू तुम हो विकराल,

कहती है दुनिया तुम्हे महाकाल,

तुम हो पिता मैं तुम्हारा हूँ लाल,

मिल जाओ मुझको हो जाए कमाल,

मेरे जीवन की नैया तेरे हाथ,

ओ मेरे बाबा भोलेंनाथ ॥


ना मांगू मैं हीरे मोती,

ना मांगू मैं सोना चांदी,

मांगू तो बस तेरा साथ,

ओ मेरे बाबा भोलेनाथ,

ओ मेरे बाबा भोलेंनाथ ॥

कुंभ संक्रांति 2025 कब है

सनातन धर्म में कुंभ संक्रांति का विशेष महत्व है। इस दिन गंगा स्नान और दान करने की परंपरा है। क्योंकि, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान के बाद दान-पुण्य करने से सूर्य देव की विशेष कृपा भी प्राप्त होती है।

शीश गंग अर्धंग पार्वती (Sheesh Gang Ardhang Parvati)

शीश गंग अर्धंग पार्वती,
सदा विराजत कैलासी ।

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रबोधिनी एकादशी (Kaartik Maas Ke Shukl Paksh Kee Prabodhinee Ekaadashee)

ब्रह्माजी ने कहा कि हे मनिश्रेष्ठ ! गंगाजी तभई तक पाप नाशिनी हैं जब तक प्रबोधिनी एकादशी नहीं आती। तीर्थ और देव स्थान भी तभी तक पुण्यस्थल कहे जाते हैं जब तक प्रबोधिनी का व्रत नहीं किया जाता।

इस धरती पर स्वर्ग से सुन्दर, है तेरा दरबार(Is Dharti Par Swarg Se Sundar Hai Tera Darbar)

इस धरती पर स्वर्ग से सुन्दर,
है तेरा दरबार ॥

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