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शंभू ये तेरी माया, कहीं है धूप कहीं है छाया(Shambhu Ye Teri M aya Kahin Hai Dhup Kahin Hai Chaya)

शंभू ये तेरी माया,

कहीं है धूप कहीं है छाया,

खुद तूने विष पिया,

औरो को अमृत पिलाया,

तेरे जैसा योगी,

ना मिला है ना पाया,

सांसें तब तक चलेगी,

जब तक रहेगा तेरा साया,

शम्भु ये तेरी माया,

कहीं है धूप कहीं है छाया ॥


तू अघोरी भस्म सनी तेरी काया,

त्रिशूल उठा के तांडव,

जब डमरू डमडमाया,

कांपी ये धरती जग घबराया,

अंबर थर थराया,

शम्भु ये तेरी माया,

कहीं है धूप कहीं है छाय ॥


औरो को दौलत बांटे,

खुद से दूर मोह माया,

सांसो में योगी,

योगी में संसार समाया,

शम्भु ये तेरी माया,

कहीं है धूप कहीं है छाया ॥


शंभू ये तेरी माया,

कहीं है धूप कहीं है छाया,

खुद तूने विष पिया,

औरो को अमृत पिलाया,

तेरे जैसा योगी,

ना मिला है ना पाया,

सांसें तब तक चलेगी,

जब तक रहेगा तेरा साया,

शम्भु ये तेरी माया,

कहीं है धूप कहीं है छाया ॥


मार्गशीर्ष शुक्ल की मोक्षदा एकादशी (Margshersh Sukal Ki Mouchda Ekadashi) )

इतनी कथा सुन महाराज युधिष्ठिर बोले- हे दशी जनार्दन आपको नमस्कार है। हे देवेश ! मनुष्यों के कल्याण के लिए मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का नाम एवं माहात्म्य वर्णन कर यह बतलाइये कि उसकीएकादशी माहात्म्य-भाषा विधि क्या है?

नाम लेगा जो बजरंगबली का(Naam Lega Jo Bajrangbali Ka)

नाम लेगा जो बजरंगबली का,
कष्ट जीवन के सारे कटेंगे ॥

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के उपाय

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से सभी विघ्न समाप्त होते हैं और जीवन में शुभता आती है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को विधिपूर्वक करने से व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।

जय गणेश काटो कलेश (Jai Ganesh Kato Kalesh)

विघ्नहरण मंगलकरण,
गौरी सुत गणराज,

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