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श्री डिग्गी वाले बाबा देव निराले, तेरी महिमा अपरम्पार है (Shree Diggi Wale Dev Nirale Teri Mahima Aprampar Hai)

श्री डिग्गी वाले बाबा देव निराले,

तेरी महिमा अपरम्पार है,

रामधुन गाए सिंदूर सजाये,

चहूं ओर तेरी जय जयकार है,

श्री डिग्गी वालें बाबा देव निराले,

तेरी महिमा अपरम्पार है ॥


भुजा गदा विराजे,

ध्वजा कर मे साजे,

गल तेरे मोतियन हार है,

श्री डिग्गी वालें बाबा देव निराले,

तेरी महिमा अपरम्पार है ॥


बाबा रोग मिटाये,

बाबा कष्ट भगाये,

बाबा सबका संकटहार है,

श्री डिग्गी वालें बाबा देव निराले,

तेरी महिमा अपरम्पार है ॥


नित भोग लगाये,

सियाराम धुन गाये,

दर भक्तो की लम्बी कतार है,

श्री डिग्गी वालें बाबा देव निराले,

तेरी महिमा अपरम्पार है ॥


भक्त शीश झुकाये और,

सर्व सुख पाये,

बाबा सबका पालनहार है,

श्री डिग्गी वालें बाबा देव निराले,

तेरी महिमा अपरम्पार है ॥


राधे आरती उतारे,

तेरा नाम उचारे,

कहे सबका बेड़ा पार है,

श्री डिग्गी वालें बाबा देव निराले,

तेरी महिमा अपरम्पार है ॥


सुंदरकांड सुनाये,

सब तुझको रिझाये,

मित्र मंडल भी बलिहार है,

श्री डिग्गी वालें बाबा देव निराले,

तेरी महिमा अपरम्पार है ॥


श्री डिग्गी वाले बाबा देव निराले,

तेरी महिमा अपरम्पार है,

रामधुन गाए सिंदूर सजाये,

चहूं ओर तेरी जय जयकार है,

श्री डिग्गी वालें बाबा देव निराले,

तेरी महिमा अपरम्पार है ॥

प्रदोष व्रत पर बन रहा अद्भुत योग

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए समर्पित है। 13 दिसंबर 2024 को मार्गशीर्ष मास का अंतिम प्रदोष व्रत रखा जाएगा।

शीतला अष्टमी पर बासी भोजन का महत्व

शीतला अष्टमी, जिसे बसोड़ा भी कहा जाता है, होली के सात दिन बाद मनाई जाती है। इस दिन माता शीतला को बासी भोजन का भोग अर्पित किया जाता है।

मंत्र के प्रकार

मंत्रों के कई प्रकार होते हैं, जरूरत के हिसाब से इन मंत्रों का उपयोग किया जाता है। मंत्रों के प्रकार और उनके उपयोग से होने लाभों पर नज़र डालें तो आप पाएंगे ये विभिन्न रूपों में हैं।

मन चल रे वृन्दावन धाम(Man Chal Re Vrindavan Dham)

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राधे राधे गाएंगे,

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