परदे में बैठे, यूँ ना मुस्कुराइये (Parde Me Bethe Bethe Yun Na Muskuraiye)

परदे में बैठे-बैठे,

यूँ ना मुस्कुराइये,

आ गए तेरे दीवाने,

जरा परदा हटाइए ॥


परदा तेरा हमें नहीं,

मंजूर सांवरे,

बैठा है छुप के दीवानो से,

क्यों दूर सांवरे,

मैं भी तो आया दो कदम,

जरा तुम भी बढ़ाइए,

आगए तेरे दीवाने,

जरा परदा हटाइए ॥


हम चाहने वाले हैं तेरे,

हमे है तुमसे मोहब्बत,

कर दो करम जरा दिखा दो,

अब सांवरी सूरत,

प्यासी निगाहे दीद की,

जरा नजरे मिलाइए,

आ गए तेरे दीवाने,

जरा परदा हटाइए ॥


तेरी इक झलक को प्यारे,

मेरा अब दिल बेकरार है,

दीदार की तमन्ना मुझे अब,

तेरा इंतजार है,

रह-रह के हमें इस तरह,

यूँ न सताइए,

आ गए तेरे दीवाने,

जरा परदा हटाइए ॥


तू ही जिंदगी है बंदगी,

तू ही आरजू हमारी,

अरमान मेरे दिल का करो,

पूरा बांके बिहारी

चित्र विचत्र को अपने प्रेम का,

पागल बनाइये ,

आ गए तेरे दीवाने,

जरा परदा हटाइए ॥


परदे में बैठे-बैठे,

यूँ ना मुस्कुराइये,

आ गए तेरे दीवाने,

जरा परदा हटाइए ॥

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बड़े तुम्हारे है उपकार मैया(Bade Tumhare Hai Upkar Maiya)

बड़े तुम्हारे है उपकार मैया,
तुमने जो होके दयाल,

कान्हा तेरी कबसे बाट निहारूं - भजन (Kanha Teri Kabse Baat Niharun)

कान्हा तेरी कबसे,
बाट निहारूं,

नर्मदा जयंती उपाय

गंगा नदी की तरह ही मां नर्मदा को भी बहुत ही पवित्र और पूजनीय माना गया है। भारत में छोटी-बड़ी 200 से अधिक नदियां हैं, जिसमें पांच बड़ी नदियों में नर्मदा भी एक है। इतना ही नहीं, मान्यता है कि नर्मदा के स्पर्श से ही पाप मिट जाते हैं। इसलिए, प्रतिवर्ष माघ महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को नर्मदा जयंती मनाई जाती है।

अन्नपूर्णा जयंती कब है

माता अन्नपूर्णा को हिंदू धर्म में अन्न और धन की देवी के रूप में स्थान प्राप्त है। माना जाता है कि मां अन्नपूर्णा के कृपा से ही पृथ्वी लोक के सभी जीवों को खाने के लिए भोजन या अन्न प्राप्त होता है।

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