राम का हर पल ध्यान लगाए, राम नाम मतवाला (Ram Ka Har Pal Dhyan Lagaye Ram Naam Matwala)

राम का हर पल ध्यान लगाए,

राम नाम मतवाला,

चिर के सीना दरश कराए,

माँ अंजनी का लाला,

बाला राम का दीवाना,

सियाराम का दीवाना,

राम का दीवाना,

सियाराम का दीवाना ॥


अंग सिंदूर विराजे है,

राम मगन हो नाचे है,

राम के सिवा तो इसे,

कुछ भी ना भाए रे,

महिमा राम की गाते है,

छम छम नाच दिखाते है,

राम के बिना ये माला,

तोड़ बिखराए रे,

राम को दिल में बसा के,

मुस्का के गुण गा के,

देखो राम को रिझाए,

हनुमान सा दूजा ना है,

रघुवर का रखवाला,

चिर के सीना दरश कराए,

माँ अंजनी का लाला,

राम का दीवाना,

सियाराम का दीवाना,

राम का दीवाना,

सियाराम का दीवाना ॥


रघुनन्दन का प्यारा है,

सीता का दुलारा है,

राम जी का मेरा बाबा

साथ निभाए है,

राम की सेवा करता है,

राम की पूजा करता है,

राम के द्वारे बैठा,

चुटकी बजाए रे,

राम का ये है दीवाना,

मस्ताना हनुमाना देखो,

राम धुन गाए,

जब जब राम पे विपदा आई,

इसने संकट टाला,

चिर के सीना दरश कराए,

माँ अंजनी का लाला,

राम का दीवाना,

सियाराम का दीवाना,

राम का दीवाना,

सियाराम का दीवाना ॥


राम भजन जहाँ होता है,

वहां पे हाजिर रहता है,

राम के भजन में ये,

सुध बिसराए रे,

जिस घर राम बसेरा है,

हनुमत का वहां पहरा है,

‘हर्ष’ कभी ना वहां,

विपदा सताए रे,

राम का नाम सुहाए,

मन भाए दिल लुभाए,

देखो हरि गुण गाए,

आँख मीच कर ध्यान लगाए,

फेरे राम की माला,

चिर के सीना दरश कराए,

माँ अंजनी का लाला,

राम का दीवाना,

सियाराम का दीवाना,

राम का दीवाना,

सियाराम का दीवाना ॥


राम का हर पल ध्यान लगाए,

राम नाम मतवाला,

चिर के सीना दरश कराए,

माँ अंजनी का लाला,

बाला राम का दीवाना,

सियाराम का दीवाना,

राम का दीवाना,

सियाराम का दीवाना ॥

........................................................................................................
कितने साल तक रखना चाहिए एकादशी और प्रदोष व्रत

हिन्दू धर्म में एकादशी और प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। ये व्रत धार्मिक श्रद्धा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभ के लिए किए जाते हैं।

जगदम्बे भवानी माँ, तुम कुलदेवी मेरी(Jagdambe Bhawani Maa Tum Kuldevi Meri)

जगदम्बे भवानी माँ,
तुम कुलदेवी मेरी,

राम को देखकर श्री जनक नंदिनी (Ram Ko Dekh Kar Shri Janak Nandini)

राम को देखकर श्री जनक-नंदिनी, बाग़ में जा खड़ी की खड़ी रह गयीं

होरी खेली न जाय (Hori Kheli Na Jaay)

नैनन में पिचकारी दई,
मोय गारी दई,

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।