रंगपंचमी के खास उपाय

Rang Panchami Upay: होली के पांच दिन बाद मनाई जाती है रंग पंचमी, इस दिन करें ये खास उपाय 


रंग पंचमी का पर्व हर साल चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी ने होली खेली थी, और देवी-देवता भी होली खेलने के लिए पृथ्वी पर आए थे। इस बार रंग पंचमी 19 मार्च 2025 को मनाई जाएगी। इस दिन कुछ खास उपाय करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।



रंग पंचमी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त


वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि का प्रारंभ 18 मार्च को रात 10:09 बजे से होगा और यह 20 मार्च को दोपहर 12:36 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, रंग पंचमी का पर्व 19 मार्च को मनाया जाएगा।



रंग पंचमी के शुभ उपाय


1. धन और सुख-समृद्धि के लिए उपाय


  • इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
  • पूजा के दौरान उन्हें लाल गुलाल अर्पित करें और कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।
  • ऐसा करने से धन वृद्धि होती है और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं।


2. मनोकामनाएं पूरी करने के लिए उपाय


  • सुबह स्नान कर सूर्य देव को जल अर्पित करें।
  • धन की देवी माता लक्ष्मी को फूल चढ़ाएं और देसी घी का दीपक जलाकर पूजा करें।
  • मां लक्ष्मी का ध्यान करने से मनचाही इच्छाएं पूरी होती हैं।


3. विवाह और दांपत्य जीवन की बाधाएं दूर करने के उपाय


  • श्रीकृष्ण और राधा रानी को पीले फूल और चरणों में लाल गुलाल अर्पित करें।
  • घर के मुख्य द्वार पर गुलाल छिड़कें और दीपक जलाएं।
  • हल्दी, चने की दाल, गुड़ और पीले वस्त्र का दान करें।
  • यह उपाय करने से विवाह की बाधाएं दूर होती हैं और दांपत्य जीवन मधुर बनता है।

........................................................................................................
कबहुँ ना छूटी छठि मइया (Kabahun Na Chhooti Chhath)

कबहुँ ना छूटी छठि मइया,
हमनी से बरत तोहार

कृपा करे रघुनाथ जी, म्हने सत देवे सीता माता (Kripa Kare Raghunath Ji Mhane Sat Deve Sita Mata)

कृपा करे रघुनाथ जी,
म्हने सत देवे सीता माता,

बसाले मन मंदिर में राम (Basale Maan Mandir Me Ram)

बसाले मन मंदिर में राम,
बनेंगे बिगड़े तेरे काम,

मत्स्य द्वादशी कब है

भगवान विष्णु के 24 अवतारों में से एक मत्स्य अवतार की जयंती के रूप में मनाया जाने वाला मत्स्य द्वादशी पर्व इस साल दिसंबर में मनाया जाएगा। यह पर्व मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है ।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।