ओ शेरावाली माँ, क्या खेल रचाया है (O Sherawali Maa Kya Khel Rachaya Hai)

ओ शेरावाली माँ,

क्या खेल रचाया है,

तू प्यार का सागर है,

तू मन का किनारा है,

ओ शेरावाली मां,

क्या खेल रचाया है ॥


देखि है तेरी दुनिया,

क्या रचना रचाई है,

दिन रात के चक्कर में,

कुछ समझ ना आई है,

हर पल जो बीत रहा,

माँ तेरा ईशारा है,

ओ शेरावाली मां,

क्या खेल रचाया है ॥


महलों में भी दुःख देखे,

और सड़को पे खुशहाली,

कोई राजा है किस्मत का,

कोई किस्मत से खाली,

सब तेरी लीला है,

सब तेरा फ़साना है,

ओ शेरावाली मां,

क्या खेल रचाया है ॥


कोई फूलों पे सो ना सके,

कोई कांटो में हँसता है,

कही मौत हुई सस्ती,

कही जीवन महंगा है,

कोई खुशियों में डूबा है,

कोई गम का मारा है,

ओ शेरावाली मां,

क्या खेल रचाया है ॥


कोई जन्म से पहले मरे,

कोई मर के भी जीता है,

कोई घाव लगाता है,

कोई जख्मों को सीता है,

ये कैसी हकीकत है,

ये कैसा नजारा है,

ओ शेरावाली मां,

क्या खेल रचाया है ॥


कोई दुःख को सुख समझे,

कोई सुख में भी रोता है,

आशा और तृष्णा का,

कभी अंत ना होता है,

इस भूल भुलैया में,

पड़ा दास बेचारा है,

ओ शेरावाली मां,

क्या खेल रचाया है ॥


ओ शेरावाली माँ,

क्या खेल रचाया है,

तू प्यार का सागर है,

तू मन का किनारा है,

ओ शेरावाली मां,

क्या खेल रचाया है ॥

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सालासर धाम निराला बोलो जय बालाजी (Salasar Dham Nirala Bolo Jay Balaji)

सालासर धाम निराला,
की बोलो जय बालाजी,

तेरे नाम की धुन लागी (Tere Naam Ki Dhun Lagi)

तेरे नाम की धुन लागी,
मन है तेरा मतवाला,

आओ मेरी सखियो मुझे मेहँदी लगा दो (Aao Meri Sakhiyo Mujhe Mehandi Laga Do)

ऐसे वर को क्या वरु,
जो जनमे और मर जाये,

पहली मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 2025

सनातन हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए मासिक कृष्ण जन्माष्टमी बहुत ही खास और पवित्र पर्व माना जाता है। यह दिन जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है।

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