शेरावाली का लगा है दरबार (Sherawali Ka Laga Hai Darbar)

शेरावाली का लगा है दरबार,

जयकारा माँ का बोलते रहो,

मेहरवाली का सजा है दरबार,

जयकारा माँ का बोलते रहो,

जयकारा माँ का जयकारा,

शेरावाली का लगा हैं दरबार,

जयकारा माँ का बोलते रहो ॥


पर्वत की ऊँची सी चोटी,

चोटी ऊपर जगती ज्योति,

बैठी शेर पे होके सवार,

जयकारा माँ का बोलते रहो,

शेरावाली का लगा हैं दरबार,

जयकारा माँ का बोलते रहो ॥


ढम ढम ढोल नगाड़े बाजे,

झूम झूम के जोगन नाचे,

माँ की हो रही जय जयकार,

जयकारा माँ का बोलते रहो,

शेरावाली का लगा हैं दरबार,

जयकारा माँ का बोलते रहो ॥


बजरंगी माँ की सेवा में खड़े,

भैरोनाथ आरती उतारे,

गंगा मैया रही चरण पखार,

जयकारा माँ का बोलते रहो,

शेरावाली का लगा हैं दरबार,

जयकारा माँ का बोलते रहो ॥


लुटा रही माँ अटल खजाना,

भर भर झोली लुटे जमाना,

माँ ने खोल दिए रे भंडार,

जयकारा माँ का बोलते रहो,

शेरावाली का लगा हैं दरबार,

जयकारा माँ का बोलते रहो ॥


शेरावाली का लगा है दरबार,

जयकारा माँ का बोलते रहो,

मेहरवाली का सजा है दरबार,

जयकारा माँ का बोलते रहो,

जयकारा माँ का जयकारा,

शेरावाली का लगा हैं दरबार,

जयकारा माँ का बोलते रहो ॥

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फाल्गुन में देवताओं की पूजा

माघ पूर्णिमा के बाद फाल्गुन माह की शुरुआत होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह हिंदू वर्ष का अंतिम महीना होता है। इसके उपरांत हिन्दू नववर्ष आ जाएगा। फाल्गुन के महीने को फागुन का महीना भी कहा जाता है।

जय महाकाली शेरावाली, सारे जग की तू रखवाली (Jai Mahakali Sherawali Saare Jag Ki Tu Rakhwali)

जय महाकाली शेरावाली,
सारे जग की तू रखवाली,

सुनो भवानी अरज हमारी, दया करो माँ कृपा करो माँ (Suno Bhawani Araj Hamari Daya Karo Maa Kripa Karo Maa)

सुनो भवानी अरज हमारी,
दया करो माँ कृपा करो माँ,

श्री विश्वकर्मा चालीसा (Shri Vishwakarma Chalisa)

श्री विश्वकर्म प्रभु वन्दऊं, चरणकमल धरिध्यान।
श्री, शुभ, बल अरु शिल्पगुण, दीजै दया निधान॥

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