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आओ बालाजी, आओं बालाजी (Aao Balaji Aao Balaji)

आओ बालाजी,

आओं बालाजी,

दर्शन को प्यासे हैं नैना,

दर्श दिखाओ जी,

आओं बालाजी आओं बालाजी ॥


निशदिन गुणगान करूँ,

तेरा ही ध्यान धरूँ,

गिरूं सौ बार मगर,

नज़रों से ना तेरे गिरूं,

जीवन मेरा सफल बनाओ,

झलक दिखाओ जी,

दर्शन को प्यासे हैं नैना,

दर्श दिखाओ जी,

आओं बालाजी आओं बालाजी ॥


सालासर तेरा है,

मेहंदीपुर तेरा है,

जहाँ हर कण कण में,

तेरा ही बसेरा है,

मेरे मन के मंदिर में भी,

धाम बनाओ जी,

दर्शन को प्यासे हैं नैना,

दर्श दिखाओ जी,

आओं बालाजी आओं बालाजी ॥


ज्ञान के सागर हो,

सियाराम के चाकर हो,

हो किनारा तुम ही प्रभु,

तुम ही भव सागर हो,

‘राशि’ की अर्ज़ी स्वीकारो,

लाज बचाओ जी,

दर्शन को प्यासे हैं नैना,

दर्श दिखाओ जी,

आओं बालाजी आओं बालाजी ॥


आओ बालाजी,

आओं बालाजी,

दर्शन को प्यासे हैं नैना,

दर्श दिखाओ जी,

आओं बालाजी आओं बालाजी ॥

भगवत गीता चालीसा ( Bhagwat Geeta Chalisa )

प्रथमहिं गुरुको शीश नवाऊँ | हरिचरणों में ध्यान लगाऊँ ||१||

मीरा दीवानी हो गयी रे (Meera Deewani Ho Gayi Re..)

मीरा दीवानी हो गयी रे, मीरा दीवानी हो गयी ।
मीरा मस्तानी हो गयी रे, मीरा मस्तानी हो गयी ॥

चले पवन की चाल, मेरा बजरंगबली (Chale Pawan Ki Chaal Mera Bajrangbali)

लाल लंगोटा हाथ में सोटा,
चले पवन की चाल,

ललिता चालीसा का पाठ

ललिता जयंती का पर्व हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। ललिता माता आदिशक्ति त्रिपुर सुंदरी जगत जननी हैं। मान्यता है कि देवी के दर्शन मात्र से ही भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

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