नवीनतम लेख

ऐ री मैं तो प्रेम दिवानी (Ae Ri Main To Prem Diwani)

ऐ री मैं तो प्रेम-दिवानी,

मेरो दर्द न जाणै कोय ।

ऐ री मैं तो प्रेम-दिवानी,

मेरो दर्द न जाणै कोय ।


ऐ री मैं तो प्रेम-दिवानी,

मेरो दर्द न जाणै कोय ।


घायल की गति घायल जाणै,

जो कोई घायल होय ।

जौहरि की गति जौहरी जाणै,

की जिन जौहर होय ॥


सूली ऊपर सेज हमारी,

सोवण किस बिध होय ।

गगन मंडल पर सेज पिया की,

किस बिध मिलणा होय ॥


दर्द की मारी बन-बन डोलूं,

वैद्य मिल्या नहिं कोय ।

मीरा की प्रभु पीर मिटेगी,

जद वैद्य सांवरिया होय ॥


ऐ री मैं तो प्रेम-दिवानी,

मेरो दर्द न जाणै कोय ।

ऐ री मैं तो प्रेम-दिवानी,

मेरो दर्द न जाणै कोय ।


श्री शनि चालीसा (Shri Shani Chalisa)

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥

श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् (Durga Ashtottara Shatanama Stotram)

दुर्गाअष्टोत्तरशतनामस्तोत्र एक पवित्र हिंदू मंत्र या स्तोत्र है, जिसमें देवी दुर्गा के 108 नामों का वर्णन है। यह स्तोत्र दुर्गा सप्तशती के अंदर आता है और देवी दुर्गा की महिमा और शक्ति का वर्णन करता है।

देवी सरस्वती स्तोत्रम् (Devi Saraswati Stotram)

या कुन्देन्दु-तुषारहार-धवलाया शुभ्र-वस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकराया श्वेतपद्मासना।

गणेश जी की आरती व मंत्र

प्रत्येक महीने दो पक्ष होते हैं शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है, जबकि कृष्ण पक्ष की चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी कहलाती है। मार्गशीर्ष महीने में मनाई जाने वाली विनायक चतुर्थी भगवान गणेश की कृपा पाने का उत्तम समय है।

यह भी जाने