नवीनतम लेख

बंसी बजा के मेरी निंदिया चुराई (Bansi Bajake Meri Nindiya Churai)

बंसी बजा के मेरी निंदिया चुराई,

लाडला कन्हैया मेरा कृष्ण कन्हाई,

कुञ्ज गली में ढूंढें तुम्हे राधा प्यारी,

कहाँ गिरधारी मेरे कहाँ गिरधारी ॥


आँख मिचौली काहे खेले तु कान्हा,

पलके बिछाए बैठी तेरी में राधा,

काश में तेरी बन जाती बंसुरिया,

अधरों से तेरे लग जाती में सांवरिया,

नैना निहारे पन्थ आओ मुरारी,

कहाँ गिरधारी मेरे कहाँ गिरधारी ॥


याद जो आये मोहे पल महारास के,

थिरके पायलिया मृदंग ताल पे,

जितनी गोपिया उतने गोविन्दा,

कण कण में हे जेसे भगवंता,

पल ना पड़े अब कान्हा पल पल भारी,

कहाँ गिरधारी मेरे कहा गिरधारी ॥


बंसी बजा के मेरी निंदिया चुराई,

लाडला कन्हैया मेरा कृष्ण कन्हाई,

कुञ्ज गली में ढूंढें तुम्हे राधा प्यारी,

कहाँ गिरधारी मेरे कहाँ गिरधारी ॥

उत्पन्ना एकादशी का चालीसा

उत्पन्ना एकादशी सनातन धर्म में एक महत्वपूर्ण तिथि है, जो भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। वैसे तो हर माह में दो एकादशी आती है, लेकिन उत्पन्ना एकादशी का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि इस दिन मां एकादशी का जन्म हुआ था।

करवा और उसके सात भाइयों की कथा

करवा चौथ के एक अन्य कथा के अनुसार एक समय में किसी नगर में एक साहूकार अपनी पत्नी 7 पुत्रों, 7 पुत्रवधुओं तथा एक पुत्री के साथ निवास करता था।

कुंभ संक्रांति पूजा-विधि और नियम

जिस तरह सूर्यदेव के मकर राशि में प्रवेश से मकर संक्रांति मनाई जाती है। उसी तरह जिस दिन सूर्यदेव कुंभ राशि में प्रवेश कर सकते हैं, वह दिन कुंभ संक्रांति के नाम से जाना जाता है।

संसार का सारा सुख केवल, श्री राम तुम्हारे चरणों में(Sansar Ka Sara Sukh Keval Shree Ram Tumhare Charno Mein)

संसार का सारा सुख केवल,
श्री राम तुम्हारे चरणों में,

यह भी जाने