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बनवारी रे! जीने का सहारा तेरा नाम रे (Banwari Re Jeene Ka Sahara Tera Naam Re)

बनवारी रे,

जीने का सहारा तेरा नाम रे,

मुझे दुनिया वालों से क्या काम रे ॥


झूठी दुनिया, झूठे बंधन,

झूठी है ये माया,

झूठा साँस का आना जाना,

झूठी है ये काया,

यहाँ साँचो तेरो नाम रे ।


बनवारी रे,

जीने का सहारा तेरा नाम रे,

मुझे दुनिया वालों से क्या काम रे ॥


रंग में तेरे, रंग गयी गिरधर,

छोड़ दिया जग सारा,

बन गयी तेरे प्रेम के जोगन,

ले के मन एकतारा,

मुझे प्यारा तेरा धाम रे ।


बनवारी रे,

जीने का सहारा तेरा नाम रे,

मुझे दुनिया वालों से क्या काम रे ॥


दर्शन तेरा, जिस दिन पाऊँ,

हर चिंता मिट जाये,

जीवन मेरा इन चरणों में,

आस की ज्योत जलाये,

मेरी बाँह पकड़ लो श्याम रे ।


बनवारी रे,

जीने का सहारा तेरा नाम रे,

मुझे दुनिया वालों से क्या काम रे ॥

महालक्ष्म्यष्टकम् (Mahalakhtam)

नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।
शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते॥

क्या है वैदिक मंत्र?

दिक मंत्र सदियों से सनातन संस्कृति और हिंदू धर्म का अभिन्न हिस्सा रहा हैं। ये मंत्र प्राचीन वैदिक साहित्य से उत्पन्न हुए हैं और इनका उल्लेख वेदों, उपनिषदों और अन्य धर्मग्रंथों में भी मिलता है।

कलावा उतारने के नियम

सनातन धर्म में कलावा बांधने का काफ़ी महत्व है। इसे रक्षा सूत्र के नाम से भी जाना जाता है। दरअसल, हाथ पर कलावा बांधने की शुरुआत माता लक्ष्मी से जुड़ी हुई है।

ललिता देवी मूल मंत्र और स्तोत्र

ललिता जयंती का पर्व हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। अगर व्यक्ति पूरी श्रद्धा के साथ मां की पूजा करे तो मां उसे शक्ति प्रदान करती हैं।

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