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भक्तो का कल्याण करे रे, मेरा शंकर भोला (Bhakto Ka Kalyan Kare Re Mera Shankar Bhola)

भक्तो का कल्याण करे रे,

मेरा शंकर भोला,

हर मुश्किल आसान करे रे,

मेरा शंकर भोला,

ओ मेरा शंकर भोला,

ओ मेरा शम्भू भोला ॥


विष का प्याला पिने वाले,

नीलकंठ कहलाने वाले,

सबको अमृत दान करे रे,

मेरा शंकर भोला,

हर मुश्किल आसान करे रे,

मेरा शंकर भोला,

ओ मेरा शंकर भोला,

ओ मेरा शम्भू भोला ॥


तीसरा नेत्र जब भी खोले,

जल थल धरती अम्बर डोले,

दूर सबका अभिमान करे रे,

मेरा शंकर भोला,

हर मुश्किल आसान करे रे,

मेरा शंकर भोला,

ओ मेरा शंकर भोला,

ओ मेरा शम्भू भोला ॥


जटाजूट तन भस्म रमाए,

त्रिलोकी के नाथ कहाए,

नवयुग का निर्माण करे रे,

मेरा शंकर भोला,

हर मुश्किल आसान करे रे,

मेरा शंकर भोला,

ओ मेरा शंकर भोला,

ओ मेरा शम्भू भोला ॥


भटके को शिव राह दिखाए,

हर संकट को दूर भगाए,

‘सितारा’ सुख परवान करे रे,

मेरा शंकर भोला,

हर मुश्किल आसान करे रे,

मेरा शंकर भोला,

ओ मेरा शंकर भोला,

ओ मेरा शम्भू भोला ॥


भक्तो का कल्याण करे रे,

मेरा शंकर भोला,

हर मुश्किल आसान करे रे,

मेरा शंकर भोला,

ओ मेरा शंकर भोला,

ओ मेरा शम्भू भोला ॥

घुमतड़ा घर आवो, ओ म्हारा प्यारा गजानन (Ghumta Ghar Aao Mhara Pyara Gajanan)

घुमतड़ा घर आवो,
ओ म्हारा प्यारा गजानन,

फुलेरा दूज की कथा

फुलेरा दूज हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण त्योहार है, जो भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को समर्पित होता है। इस दिन को उत्तरी राज्य खासकर ब्रज क्षेत्र में उत्साहपूर्वक मनाया जाता है।

गौरा ढूंढ रही पर्वत पर(Gora Dhund Rahi Parvat Pe)

गौरा ढूंढ रही पर्वत पर,
शिव को पति बनाने को,

जरा इतना बता दे कान्हा, कि तेरा रंग काला क्यों - भजन (Jara Etna Bata De Kanha Tera Rang Kala Kyo)

जरा इतना बता दे कान्हा,
कि तेरा रंग काला क्यों ।

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