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भाव सुमन लेकर मैं बैठा, गौरी सुत स्वीकार करो (Bhav Suman Lekar Main Baitha Gaurisut Swikar Karo)

भाव सुमन लेकर मैं बैठा,

गौरी सुत स्वीकार करो,

हे गणनायक शुभ वरदायक,

हे गणनायक शुभ वरदायक,

आकर सिर पर हाथ धरो,

भाव सुमन लेकर मै बैठा,

गौरी सुत स्वीकार करो ॥


विद्यावारिधि बुद्धिविधाता,

आप दया के सागर हो,

भक्तों के दुःख हरने वाले,

ना तुमसे करुणाकर हो,

रिद्धि सिद्धि के देने वाले,

हम पर भी उपकार करो,

भाव सुमन लेकर मै बैठा,

गौरी सुत स्वीकार करो ॥


लम्बोदर गजवदन विनायक,

विघ्न हरण कर लो सारे,

मोदक प्रिय मुदमंगल त्राता,

दुःख दारिद्र हरने वाले,

लाज तुम्हारे हाथ गजानन,

भव से बेड़ा पार करो,

भाव सुमन लेकर मै बैठा,

गौरी सुत स्वीकार करो ॥


‘आलूसिंह’ तेरी महिमा का,

पार नहीं कोई पाया,

त्रास हरो सांवल की सारी,

द्वार आपके ये आया,

दास तुम्हारे श्री चरणों का,

हम सबके भंडार भरो,

भाव सुमन लेकर मै बैठा,

गौरी सुत स्वीकार करो ॥


भाव सुमन लेकर मैं बैठा,

गौरी सुत स्वीकार करो,

हे गणनायक शुभ वरदायक,

हे गणनायक शुभ वरदायक,

आकर सिर पर हाथ धरो,

भाव सुमन लेकर मै बैठा,

गौरी सुत स्वीकार करो ॥


मंगलवार व्रत कथा और महत्व

सनातन हिंदू धर्म में हनुमान जी को पराक्रम, साहस और भक्ति का देवता माना गया है। इनकी पूजा हेतु मंगलवार का दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

हम नैन बिछाए हैं, हे गणपति आ जाओ (Hum Nain Bichaye Hai Hai Ganpati Aa Jao)

हम नैन बिछाए है,
हे गणपति आ जाओ ॥

नवरात्री का त्यौहार आया (Navratri Ka Tyohar Aaya)

नवरात्री का त्यौहार आया,
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प्रदोष व्रत की कथा (Pradosh Vrat Ki Katha )

प्राचीनकाल में एक गरीब पुजारी हुआ करता था। उस पुजारी की मृत्यु के बाद उसकी विधवा पत्नी अपने भरण-पोषण के लिए पुत्र को साथ लेकर भीख मांगती हुई शाम तक घर वापस आती थी।

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