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छोटी सी मेरी पार्वती (Chhoti Si Meri Parvati)

छोटी सी मेरी पार्वती,

शंकर की पूजा करती थी,

निर्जल रहकर निश्छल मन से,

नित ध्यान प्रभू का धरती थी,

छोटी सी मेरी पारवती,

शंकर की पूजा करती थी ॥


नित गंगा जमुना जाती थी,

जल भर भर कर वो लाती थी,

निर्जल रहकर निश्छल मन से,

नित ध्यान प्रभू का धरती थी,

छोटी सी मेरी पारवती,

शंकर की पूजा करती थी ॥


नित बाग़ बगीचा जाती थी,

वो भांग धतूरा लाती थी,

निर्जल रहकर निश्छल मन से,

नित ध्यान प्रभू का धरती थी,

छोटी सी मेरी पारवती,

शंकर की पूजा करती थी ॥


छोटी सी मेरी पार्वती,

शंकर की पूजा करती थी,

निर्जल रहकर निश्छल मन से,

नित ध्यान प्रभू का धरती थी,

छोटी सी मेरी पारवती,

शंकर की पूजा करती थी ॥

वार्षिक श्राद्ध पूजा विधि

हिंदू धर्म में श्राद्ध पूजा का विशेष महत्व है। यह पितरों यानी पूर्वजों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने का एक प्रमुख अनुष्ठान है। जो सदियों से हिंदू संस्कृति में करा जाता है। श्राद्ध संस्कार में पिंडदान, और ब्राह्मण भोजन कराया जाता है।

गौरी के लाड़ले (Gauri Ke Ladle)

गौरी के लाड़ले,
महिमा तेरी महान,

जब जब भी तेरा प्रेमी आंसू कहीं बहाए(Jab Jab Bhi Tera Premi Aansu Kahin Bahaye)

जब जब भी तेरा प्रेमी,
आंसू कहीं बहाए,

शनिदेव की पूजा कैसे करें?

हिंदू धर्म में शनिदेव को कर्मफलदाता कहा जाता है। इनके पास व्यक्ति के सभी कर्मों का लेखा-जोखा रहता है और उसी के हिसाब से व्यक्ति को शुभ और अशुभ परिणाम मिलते हैं। ऐसी मान्यता है कि इनकी पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को शनिदोष से छुटकारा मिल जाता है और जीवन में चल रही सभी परेशानियां भी दूर हो जाती है।

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