नवीनतम लेख

देव है ये भोले भक्तो का, खुद भी भोला भाला (Dev Hai Ye Bhole Bhakto Ka Khud Bhi Bhola Bhala)

देव है ये भोले भक्तो का,

खुद भी भोला भाला,

मेरा डमरू वाला,

मेरा डमरू वाला,

शमशानों में भूतो के संग,

इसने डेरा डाला,

मेरा डमरू वाला,

मेरा डमरू वाला ॥


सागर का हुआ जब मंथन,

तब देव असुर सब आए,

सबको था अमृत पीना,

कोई विष ना पीना चाहे,

छोड़ के अमृत शिव शंकर ने,

सारा विष पी डाला,

मेरा डमरू वाला,

मेरा डमरू वाला ॥


तपकर के भागीरथ ने,

गंगा धरती पे उतारी,

कोई रोक ना पाया उसको,

धारा में वेग था भारी,

बांध के अपनी जटा में उसको,

अनहोनी को टाला,

मेरा डमरू वाला,

मेरा डमरू वाला ॥


सावन के महीने में जब,

कावड़ियों की निकले टोली,

हर गली गली में गूंजे,

इसके ही नाम की बोली,

कोई बम बम बोल पुकारे,

कोई कहे बम भोला,

मेरा डमरू वाला,

मेरा डमरू वाला ॥


मेवा मिष्ठानो के हो,

या थाल भरे हो फल के,

भोले तो खुश होते है,

लुटिया भर गंगाजल से,

बेल पत्र और आक धतूरा,

और भंगिया पिने वाला,

मेरा डमरू वाला,

मेरा डमरू वाला ॥


देव है ये भोले भक्तो का,

खुद भी भोला भाला,

मेरा डमरू वाला,

मेरा डमरू वाला,

शमशानों में भूतो के संग,

इसने डेरा डाला,

मेरा डमरू वाला,

मेरा डमरू वाला ॥

कथा कहिए भोले भण्डारी जी (Katha Kahiye Bhole Bhandari Ji)

पूछे प्यारी शैलकुमारी
कथा कहिए भोले भण्डारी जी ।

श्रीराम और होली की कथा

होली का त्योहार सिर्फ द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसका संबंध त्रेतायुग और भगवान श्रीराम से भी गहरा है। कहा जाता है कि त्रेतायुग में भी होली मनाई जाती थी, लेकिन तब इसका रूप आज से थोड़ा अलग था। ये सिर्फ रंगों का खेल नहीं था, बल्कि सामाजिक, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व से जुड़ा हुआ एक अनोखा त्योहार था।

रंग पंचमी के उपाय

रंग पंचमी हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है और इसे होली के पांचवें दिन मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन देवी-देवता पृथ्वी पर आकर भक्तों पर कृपा बरसाते हैं।

दर्श अमावस्या के खास उपाय

हिंदू धर्म में दर्श अमावस्या एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन खान-पान से जुड़े कुछ खास उपाय किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

यह भी जाने