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गजमुख धारी जिसने तेरा, सच्चे मन से (Gajmukhdhari Jisne Tera Sachche Man Se)

गजमुख धारी जिसने तेरा,

सच्चे मन से जाप किया,

ऐसे पुजारी का स्वयं तुमने,

ऐसे पुजारी का स्वयं तुमने,

सिध्द मनोरथ आप किया,

गजमुख धारी जिसनें तेरा,

सच्चे मन से जाप किया ॥


तुझ चरणों की ओर लगन से,

जो साधक बढ़ जाता है,

सौ क़दम तु चलके दाता,

उसको गले लगाता है,

अंतरमन के भाव समझ के, २

काज सदा चुपचाप किया,

गजमुख धारी जिसनें तेरा,

सच्चे मन से जाप किया ॥


द्वार तुम्हारे द्रढ़ विश्वासी,

जब भी झुक कर रोता है,

उसके घर मे मंगल महके,

कभी अनिष्ट ना होता है,

उसके जीवन से प्रभु तुमने, २

दुर है दुख संताप किया,

गजमुख धारी जिसनें तेरा,

सच्चे मन से जाप किया ॥


आदि अनादि जड़ चेतन ये,

सब तेरे अधिकार मे है,

तुने बनाया तुने रचाया,

जो कुछ भी संसार मे है,

तेरी इच्छा से ही हमने, २

पुण्य किया या पाप किया,

गजमुख धारी जिसनें तेरा,

सच्चे मन से जाप किया ॥


गजमुख धारी जिसने तेरा,

सच्चे मन से जाप किया,

ऐसे पुजारी का स्वयं तुमने,

ऐसे पुजारी का स्वयं तुमने,

सिध्द मनोरथ आप किया,

गजमुख धारी जिसनें तेरा,

सच्चे मन से जाप किया ॥


जयपुर से लाई मैं तो चुनरी (Jaipur Se Layi Main Chunri)

जयपुर से लाई मैं तो,
चुनरी रंगवाई के,

क्यों मनाते हैं रथ सप्तमी

रथ सप्तमी सनातन हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। यह माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। 2025 में यह त्योहार 4 फरवरी को मनाई जाएगी।

भानु सप्तमी का व्रत क्यों रखा जाता है

हर माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर यदि रविवार होता है, तो उस दिन भानु सप्तमी मनाई जाती है। मार्गशीर्ष मास में ये विशेष संयोग 08 दिसंबर, रविवार को बन रहा है।

माँ ऊँचे पर्वत वाली, करती शेरो की सवारी(Maa Unche Parwat Wali Karti Shero Ki Sawari)

माँ ऊँचे पर्वत वाली,
करती शेरो की सवारी,

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