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गौरी के लाला हो, मेरे घर आ जाना (Gauri Ke Lala Ho Mere Ghar Aa Jana)

गौरी के लाला हो,

मेरे घर आ जाना,

घर आँगन की ओ देवा,

शोभा बढ़ा जाना,

गौरी के लाला हों,

मेरे घर आ जाना ॥


भादो मास आया है,

संग में खुशियाँ लाया है,

बड़े जतनो से है मैंने,

घर क़ो अपने सजाया है,

तूने वादा किया था मुझसे,

वादा निभा जाना,

गौरी के लाला हों,

मेरे घर आ जाना ॥


चंदन चौकी सजाऊं,

उसपे तुझको बिठाऊं,

पान फूल चढ़ाके,

मोदक भोग लगाऊं,

बड़े प्रेम से बनाए हैं,

ये लडवन खा जाना,

गौरी के लाला हों,

मेरे घर आ जाना ॥


रोज कीर्तन गजानन करूँ,

तेरी भक्ति में ध्यान धरूँ,

पुरी श्रद्धा से हे मेरे देवा,

निश दिन मैं तेरा पूजन करूँ,

अकेले ना आना प्रभु,

रिद्धि सिद्धि संग लाना,

गौरी के लाला हों,

मेरे घर आ जाना ॥


जपे तेरा जो नाम प्रभु,

करते तुमको प्रणाम प्रभु,

उनके विघ्न और बाधा टलें,

बनते बिगड़े काम प्रभु,

आस मैंने लगाई है जो,

उसको पुगा जाना,

गौरी के लाला हों,

मेरे घर आ जाना ॥


गौरी के लाला हो,

मेरे घर आ जाना,

घर आँगन की ओ देवा,

शोभा बढ़ा जाना,

गौरी के लाला हों,

मेरे घर आ जाना ॥


शुक्रवार की पूजा विधि

हिंदू धर्म में शुक्रवार का दिन विशेष रूप से देवी लक्ष्मी से जुड़ा होता है। इसे लक्ष्मी व्रत या शुक्रवार व्रत के रूप में मनाया जाता है।

देवो के देव हे महादेव (Devo Ke Dev He Mahadev)

नाथों के नाथ महादेव शिव शंकर
भीड़ में सुनसान में साक्षात् शम्भुनाथ

तेरी जय हों जय हों, जय गोरी लाल(Teri Jay Ho Jay Ho Jay Gauri Lal)

तेरी जय हो जय हो,
जय गोरी लाल ॥

कब है भीष्म द्वादशी

महाभारत में अर्जुन ने भीष्म पितामह को बाणों की शैय्या पर लिटा दिया था। उस समय सूर्य दक्षिणायन था। इसलिए, भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार किया और माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन अपने प्राण त्यागे।

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