नवीनतम लेख

गोपाल गोकुल वल्लभे, प्रिय गोप गोसुत वल्लभं (Gopal Gokul Valbhe Priya Gop Gosut Valbham)

गोपाल गोकुल वल्लभे,

प्रिय गोप गोसुत वल्लभं ।

चरणारविन्दमहं भजे,

भजनीय सुरमुनि दुर्लभं ॥


घनश्याम काम अनेक छवि,

लोकाभिराम मनोहरं ।

किंजल्क वसन किशोर मूरति,

भूरिगुण करुणाकरं ॥


सिरकेकी पच्छ विलोलकुण्डल,

अरुण वनरुहु लोचनं ।

कुजव दंस विचित्र सब अंग,

दातु भवभय मोचनं ॥


कच कुटिल सुन्दर तिलक,

ब्रुराकामयंक समाननं ।

अपहरण तुलसीदास,

त्रास बिहारी बृन्दाकाननं ॥


गोपाल गोकुल वल्लभे,

प्रिय गोप गोसुत वल्लभं ।

चरणारविन्दमहं भजे,

भजनीय सुरमुनि दुर्लभं ॥

शिवजी से दिल लगा ले (Shivji Se Dil Lagale)

शिवजी से दिल लगा ले,
शिव जी है भोले भाले,

कैसे शुरू हुई होलिका दहन की प्रथा

होली का पर्व रंगों और उमंग के साथ-साथ धार्मिक आस्था से भी जुड़ा हुआ है। होलिका दहन की परंपरा हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

तूने जीना सिखाया भोलेनाथ जी (Tune Jeena Sikhaya Bholenath Ji)

तुम्हे दिल में बसाया,
तुम्हे अपना बनाया,

मेरे बालाजी सरकार, के तो रंग निराले (Mere Balaji Sarkar Ke To Rang Nirale Hai)

मेरे बालाजी सरकार,
के तो रंग निराले,

यह भी जाने