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हार के आया मैं जग सारा (Haare Ka Sahara Mera Shyam)

हार के आया मैं जग सारा,

तेरी चौखट पर,

तुमसे ही है सारी उम्मीदें,

तुम ही लोगे खबर,

सब कहते है अपने भगत की,

श्याम हमेशा पत रखता है,

हारे का सहारा मेरा श्याम,

हमेशा मेरी लाज रखता है ॥


जग से रिश्ता तोड़ दिया है,

तुझसे नाता जोड़ लिया है,

तुझको ही माना साथी अपना,

तुझपे ही सबकुछ छोड़ दिया है,

तेरी दया से मेरा दीपक,

तूफानों में भी जलता है,

हारें का सहारा मेरा श्याम,

हमेशा मेरी लाज रखता है ॥


कलयुग की सरकार तू ही है,

जीवन का आधार तू ही है,

क्यों भटकूं मैं दर दर जाकर,

श्याम मेरा संसार तू ही है,

तेरी कृपा का हाथ है जबसे,

हर संकट खुद ही टलता है,

हारें का सहारा मेरा श्याम,

हमेशा मेरी लाज रखता है ॥


हार के आया मैं जग सारा,

तेरी चौखट पर,

तुमसे ही है सारी उम्मीदें,

तुम ही लोगे खबर,

सब कहते है अपने भगत की,

श्याम हमेशा पत रखता है,

हारे का सहारा मेरा श्याम,

हमेशा मेरी लाज रखता है ॥

भाव सुमन लेकर मैं बैठा, गौरी सुत स्वीकार करो (Bhav Suman Lekar Main Baitha Gaurisut Swikar Karo)

भाव सुमन लेकर मैं बैठा,
गौरी सुत स्वीकार करो,

गजानंद मैहर करो(Gajanand Mehar Karo)

ओ गणनायक महाराज सुमिरा जोडू दोनों हाथ,
ओ गणनायक महाराज,

भोले की किरपा, जिस पर भी रहती है (Bhole Ki Kripa Jis Par Bhi Rahti Hai)

भोले की किरपा,
जिस पर भी रहती है,

दुर्गा कवच पाठ

माता ललिता को दस महाविद्याओं की तीसरी महाविद्या माना जाता है। कहते हैं कि इस दिन देवी की आराधना करने से सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

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