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हर घडी भोले दिल में, रहा कीजिये - भजन (Har Ghadi Bhole Dil Mein Raha Kijiye)

हर घडी भोले दिल में,

रहा कीजिये,

चरणों में प्रभु जी,

जगह दीजिये,

हर घड़ी भोले दिल में,

रहा कीजिये ॥


जो भी शरण में आया तुम्हारी,

उसको प्रभु जी निभाया,

जो भी शरण में आया तुम्हारी,

उसको प्रभु जी निभाया,

मुझको भी निभाना,

वचन दीजिये,

हर घड़ी भोले दिल में,

रहा कीजिये ॥


मुझे क्या पता है हे मेरे मालिक,

कैसे भला हो हमारा,

मुझे क्या पता है हे मेरे मालिक,

कैसे भला हो हमारा,

जो भी आप चाहे वही कीजिये,

हर घड़ी भोले दिल में,

रहा कीजिये ॥


जो भी किया है कैसे बताऊँ,

बताने के लायक नहीं है,

जो भी किया है कैसे बताऊँ,

बताने के लायक नहीं है,

बालक हूँ तुम्हारा क्षमा कीजिये,

हर घड़ी भोले दिल में,

रहा कीजिये ॥


‘बनवारी’ मेरी कोशिश यही है,

तुमको मैं अपना बना लूँ,

‘बनवारी’ मेरी कोशिश यही है,

तुमको मैं अपना बना लूँ,

कोशिश ये हमारी सफल कीजिये,

हर घड़ी भोले दिल में,

रहा कीजिये ॥


हर घडी भोले दिल में,

रहा कीजिये,

चरणों में प्रभु जी,

जगह दीजिये,

हर घड़ी भोले दिल में,

रहा कीजिये ॥

चैत्र माह की पौराणिक कथा

नवरात्रि का अर्थ नौ रातें होता है, जो हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह त्योहार साल में दो बार मनाया जाता है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि। इस दौरान मां दुर्गा की पूजा आराधना की जाती है। उनके नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। चैत्र नवरात्र का खास महत्व है।

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अखियाँ हरी दर्शन की प्यासी ॥

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