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हे जग त्राता विश्व विधाता(He Jag Trata Vishwa Vidhata)

हे जग त्राता विश्व विधाता,

हे सुख शांति निकेतन हे।


प्रेम के सिन्धु, दीन के बन्धु,

दु:ख दारिद्र विनाशन हे ।

हे जग त्राता विश्व विधाता,

हे सुख शांति निकेतन हे ।


नित्य अखंड अनंन्त अनादि,

पूरण ब्रह्म सनातन हे ।

हे जग त्राता विश्व विधाता,

हे सुख शांति निकेतन हे ।


जग आश्रय जग-पति जग-वन्दन,

अनुपम अलख निरंजन हे ।

हे जग त्राता विश्व विधाता,

हे सुख शांति निकेतन हे ।


प्राण सखा त्रिभुवन प्रति-पालक,

जीवन के अवलंबन हे ।

हे जग त्राता विश्व विधाता,

हे सुख शांति निकेतन हे ।


हे जग त्राता विश्व विधाता,

हे सुख शांति निकेतन हे ।

हे सुख शांति निकेतन हे,

हे सुख शांति निकेतन हे ।

अनमोल तेरा जीवन, यूँ ही गँवा रहा है (Anmol Tera Jeevan Yuhi Ganwa Raha Hai)

अनमोल तेरा जीवन,
यूँ ही गँवा रहा है,

हार के आया मैं जग सारा (Haare Ka Sahara Mera Shyam)

हार के आया मैं जग सारा,
तेरी चौखट पर,

समुद्र मंथन और धनवंतरी की कहानी: धनतेरस व्रत कथा (Samudra Manthan aur Dhanvantari ki kahani)

प्राचीन कल की बात हैं दुर्वासा ऋषि के शाप के कारण सभी देवता भगवान विष्णु के साथ शक्तिहीन हो गए थे और साथ ही असुरो की शक्ति भी बढ़ गई थी।

ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ (O Ganga Tum,Ganga Behti Ho Kiyon)

करे हाहाकार निःशब्द सदा
ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ?

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