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हे राम भक्त हनुमान जी, मुझे ऐसी भक्ति दो(Hey Ram Bhakt Hanuman Ji Mujhe Aisi Bhakti Do)

हे राम भक्त हनुमान जी,

मुझे ऐसी भक्ति दो,

चरणों की सेवा कर सकूँ,

प्रभु ऐसी शक्ति दो,

हे राम भक्त हनुमान जी


कारज सवारन राम के,

अवतार तुम लहे,

अवतार तुम लहे,

हे शंकर सुवन अंजनीसुत,

मुझको भी मुक्ति दो,

चरणों की सेवा कर सकूँ,

प्रभु ऐसी शक्ति दो,

हे राम भक्त हनुमान जी ॥


माना की मैं श्री राम सम,

पावन नहीं प्रभु,

पावन नहीं प्रभु,

सेवा से पावन हो सकूँ,

मुझे ऐसी युक्ति दो,

चरणों की सेवा कर सकूँ,

प्रभु ऐसी शक्ति दो,

हे राम भक्त हनुमान जी ॥


जन्मों जन्मों के योग से,

सेवा का पथ मिलें,

सेवा का पथ मिलें,

इस पावन पथ पे चल सकूँ,

अब ना विरक्ति हो,

चरणों की सेवा कर सकूँ,

प्रभु ऐसी शक्ति दो,

हे राम भक्त हनुमान जी ॥


हे बलशाली हनुमत तेरी,

महिमा अनंत है,

महिमा अनंत है,

सेवक और सेवाधर्म की,

अब ना समाप्ति हो,

चरणों की सेवा कर सकूँ,

प्रभु ऐसी शक्ति दो,

हे राम भक्त हनुमान जी ॥


हे राम भक्त हनुमान जी,

मुझे ऐसी भक्ति दो,

चरणों की सेवा कर सकूँ,

प्रभु ऐसी शक्ति दो,

हे राम भक्त हनुमान जी ॥

चैत्र और शारदीय नवरात्रि में अंतर

सनातन परंपरा में नवरात्रि का पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहला चैत्र के महीने में, जिससे हिंदू नव वर्ष की भी शुरुआत होती है, जिसे चैत्र नवरात्रि कहा जाता है। दूसरा, आश्विन माह में आता है, जिसे शारदीय नवरात्रि कहते हैं।

मोरे गणपति गणेश करों किरपा(More Ganpati Ganesh Karo Kirpa)

जो कुछ है सब तोय,
तेरा तुझको सौंप दूँ,

प्रभु सोच लो जग तुम्हे क्या कहेगा (Prabhu Soch Lo Jag Tumhe Kya Kahega)

प्रभु सोच लो जग तुम्हे क्या कहेगा,
अगर तेरा प्रेमी दुखड़े सहेगा,

श्री राम कथा की महिमा को, घर घर में पहुँचाना है (Shri Ram Katha Ki Mahima Ko Ghar Ghar Me Pahuchana Hai)

श्री राम कथा की महिमा को,
घर घर में पहुँचाना है,

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