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होरी खेली न जाय (Hori Kheli Na Jaay)

नैनन में पिचकारी दई,

मोय गारी दई,

होरी खेली न जाय,

होरी खेली न जाय,

क्यों रे लँगर लँगराई मोते कीनी,

ठाड़ौ मुस्काय,

होरी खेली न जाय,

होरी खेली न जाय ॥


नेक नकान करत काहू की,

नजर बचावै भैया बलदाऊ की,

पनघट सौ घर लौं बतराय,

घर लौं बतराय,

होरी खेली न जाय,

होरी खेली न जाय ॥


औचक कुचन कुमकुमा मारै,

रंग सुरंग सीस ते ढारै,

यह ऊधम सुनि सासु रिसियाय,

सुनि सासु रिसियाय,

होरी खेली न जाय,

होरी खेली न जाय ॥


होरी के दिनन मोते दूनौ अटकै,

सालिगराम कौन याहि हटके,

अंग लिपटि हँसि हा हा खाय,

होरी खेली न जायहोरी खेली न जाय,

होरी खेली न जाय,

होरी खेली न जाय ॥

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दुर्गा सप्तशती का पाठ देवी दुर्गा की कृपा पाने का एक अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली माध्यम है। इसे 'चंडी पाठ' के नाम से भी जाना जाता है। दुर्गा सप्तशती में 700 श्लोक हैं, जो देवी दुर्गा की महिमा, उनकी विजय और शक्ति का वर्णन करते हैं।

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तुझे धोखा नहीं होगा ।

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