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जीण भवानी की दुनिया दीवानी है (Jeen Bhawani Ki Duniya Diwani Hai)

जीण भवानी की दुनिया दीवानी है,

कलयुग में माँ की एक अजब कहानी है,

ऊँचे पर्वत बैठी जग महारानी है,

माँ से हम भक्तों की प्रीत पुराणी है,

जीण भवानी की दुनिया दीवानी है,

कलयुग में माँ की एक अजब कहानी है ।


घांघू गाँव में जन्मी मैया जीवन दाई है,

गंगो सिंह जी पिता हैं माता पारी के जाइ है,

हर्षनाथ की बहना वो कहलाई है,

पराशर कुल वंशों ने कृपा पाई है,

जीण भवानी की दुनिया दीवानी है,

कलयुग में माँ की एक अजब कहानी है ।


पर्वत ऊपर घोर तपस्या माँ ने ठानी है,

माँ की आँख के नीर की काजल शिखर कहानी है,

कलयुग अवतारी भवरों की रानी है,

कहते इनको गोरिया की सेठानी है,

जीण भवानी की दुनिया दीवानी है,

कलयुग में माँ की एक अजब कहानी है।


मुग़ल सेना ने मंदिर में जब करि चढ़ाई है,

लाखों भँवरे छोड़े माँ ने धुल चटाई है,

औरंगज़ेब ने माँ से हार ये मानी है,

इतिशा ने भी माँ की महिमा जानी है,

जीण भवानी की दुनिया दीवानी है,

कलयुग में माँ की एक अजब कहानी है ।


फरवरी 2025 में इष्टि कब है

इष्टि यज्ञ वैदिक काल के प्रमुख अनुष्ठानों में से एक है। संस्कृत में ‘इष्टि’ का अर्थ ‘प्राप्ति’ या ‘कामना’ होता है। यह यज्ञ विशेष रूप से मनोकामना पूर्ति और जीवन में समृद्धि लाने के उद्देश्य से किया जाता है।

शम्भु स्तुति - नमामि शम्भुं पुरुषं पुराणं (Shambhu Stuti - Namami Shambhu Purusham Puranam)

नमामि शम्भुं पुरुषं पुराणं
नमामि सर्वज्ञमपारभावम् ।

बिगड़ी बनाने वाली, कष्ट मिटाने वाली (Bigdi Banane Wali Kasht Mitane Wali)

बिगड़ी बनाने वाली,
कष्ट मिटाने वाली,

नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो (Nagri Ho Ayodhya Si, Raghukul Sa Gharana Ho)

नगरी हो अयोध्या सी,
रघुकुल सा घराना हो ।