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जो शिव नाम होठों पे चढ़ गयो रे (Jo Shiv Naam Hothon Pe Chadh Gayo Re)

जो शिव नाम होठों पे चढ़ गयो रे,

तो समझो ये जीवन संवर गयो रे ॥


मन में बसा ले तू शिव का शिवाला,

साथ चलेगा तेरे डमरू वाला,

जो मन शिव की भक्ति में रम गयो रे,

तो समझो ये जीवन संवर गयो रे ॥


जग की ये माया बड़ी उलझाए,

पाप कर्म भक्ति के आड़े आवे,

जो शिवजी ने हाथ सिर पे धर दियो रे,

तो समझो ये जीवन संवर गयो रे ॥


बम बम बासुकी का नाम बड़ा प्यारा,

नाम ने लाखो को पार उतारा,

जो भोलेनाथ ने हाथ पकड़ लियो रे,

तो समझो ये जीवन संवर गयो रे ॥


जो शिव नाम होठों पे चढ़ गयो रे,

तो समझो ये जीवन संवर गयो रे ॥

मौनी अमावस्या पर त्रिवेणी योग

नर्मदा के पावन तटों पर माघ मास की मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं का जमघट लगा रहेगा। इस पावन पर्व पर पुण्य की डुबकी लगाने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।

कब है रुक्मिणी अष्टमी?

हिंदू धर्म में पौष मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रुक्मिणी अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्री कृष्ण की पत्नी देवी रुक्मिणी को समर्पित है, जिन्हें माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, रुक्मिणी अष्टमी पर ही द्वापर युग में विदर्भ के महाराज भीष्मक के यहां देवी रुक्मिणी जन्मी थीं।

माघ शुक्ल की जया नाम की एकादशी (Magh Shukal Ki Jya Naam Ki Ekadashi)

पाण्डुनन्दन भगवान् कृष्ण से हाथ जोड़ कर नम्रता पूर्वक बोले हे नाथ ! अब आप कृपा कर मुझसे माघ शुक्ल एकादशी का वर्णन कीजिए उस व्रत को करने से क्या पुण्य फल होता है।

भोले की किरपा से हमरे, ठाठ निराले है (Bhole Ki Kripa Se Hamare Thaat Nirale Hai)

भोले की किरपा से हमरे,
ठाठ निराले है,

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