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भोले की किरपा से हमरे, ठाठ निराले है (Bhole Ki Kripa Se Hamare Thaat Nirale Hai)

भोले की किरपा से हमरे,

ठाठ निराले है,

हम बाबा वाले है,

सुनो जी हम बाबा वाले है ॥


भजनों को तेरे गा कर,

मैं तो मस्ती में रहता,

रस्ते में जो भी मिलता,

हर हर बम बम ही कहता,

कदम कदम पर बन जाते,

भोले रखवाले है,

हम बाबा वाले है,

सुनो जी हम बाबा वाले है ॥


भोले ने जो भी दिया है,

उसे व्यर्थ ना यूँ ही गंवाओ,

भोले की भक्ति करके,

थोड़ा सा कर्ज चुकाओ,

‘श्याम’ का सारा जीवन,

भोले तेरे हवाले है,

हम बाबा वाले है,

सुनो जी हम बाबा वाले है ॥


भोले की किरपा से हमरे,

ठाठ निराले है,

हम बाबा वाले है,

सुनो जी हम बाबा वाले है ॥


राधे जय जय माधव दयिते (Radhe Jai Jai Madhav Dayite)

राधे जय जय माधव-दयिते
गोकुल-तरुणी-मंडल-महिते

मैं कितना अधम हूँ, ये तुम ही जानो (Main Kitna Adham Hu Ye Tum Hi Jano)

मैं कितना अधम हूँ,
ये तुम ही जानो,

आखिर यमुना में ही क्यों छुपा था कालिया नाग

भक्त वत्सल की जन्माष्टमी स्पेशल सीरीज के एक लेख में हमने आपको बताया था कि कैसे भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना में कूदकर कालिया नाग से युद्ध किया था। क्योंकि उसके विष से यमुना जहरीली हो रही थी।

अन्वधान और इष्टी क्या है

भारत के त्योहार और अनुष्ठान वैदिक परंपराओं में गहराई से निहित हैं। इसमें से अन्वधान और इष्टि का विशेष महत्व है। ये अनुष्ठान कृषि चक्रों और आध्यात्मिक कायाकल्प के साथ जुड़े होते हैं।

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