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मुझे रंग दे ओ रंगरेज (Mujhe Rang De O Rangrej)

मुझे रंग दे ओ रंगरेज,

चुनरिया सतरंगी,

मुझे रंग दे ओ रंगरेज,

चुनरिया सतरंगी,

मैया को जाके ओढ़ाऊँ,

चुनरिया सतरंगी ॥


चुनरिया सतरंगी, जय माँ

चुनरिया सतरंगी, जय माँ

चुनरिया सतरंगी, जय माँ

मुझे रंग दे ओ रंगरेज,

चुनरिया सतरंगी,


एक रंग रंग दे भक्ति का,

दूजा रंग रंग दे मुक्ति का,

एक रंग रंग दे भक्ति का,

दूजा रंग रंग दे मुक्ति का,

तीजा रंग रंग दे शक्ति का,

तुझको क्या समझाऊं,

चुनरिया सतरंगी,

चुनरिया सतरंगी,

चुनरिया सतरंगी,

मुझे रंग दे ओ रंगरेज,

चुनरिया सतरंगी,

चुनरिया सतरंगी ॥


चौथा रंग बलिदान का रंग दे,

रंग पाँचवा दान का रंग दे,

चौथा रंग बलिदान का रंग दे,

रंग पाँचवा दान का रंग दे,

छठा रंग सनमान* का रंग दे,

साथ में प्रेम मिलाऊँ,

सातवाँ प्रेम बताऊँ,

चुनरिया सतरंगी,

चुनरिया सतरंगी,

चुनरिया सतरंगी,

मुझे रंग दे ओ रंगरेज,

चुनरिया सतरंगी,

चुनरिया सतरंगी ॥


बाग-बाग से कलियाँ लाऊँ,

मैया के चरणों में चढ़ाऊँ,

बाग बाग से कलियाँ लाऊँ,

मैया के चरणों में चढ़ाऊँ,

तिलक लगाऊं जोत जगाऊँ,

रूठी माँ को मनाऊं,

चुनरिया सतरंगी,

चुनरिया सतरंगी,

चुनरिया सतरंगी,

मुझे रंग दे ओ रंगरेज,

चुनरिया सतरंगी,

चुनरिया सतरंगी ॥


ओ शेरावाली को, जय हो,

जोतावाली को, जय हो,

अंबे रानी को, जय हो,

वैष्णो रानी को, जय हो,

नैना देवी को, जय हो,

चिंतपूर्णी को, जय हो,

मैया को जय हो,

चुनरिया सतरंगी,

चुनरिया सतरंगी,

चुनरिया सतरंगी,

मुझे रंग दे ओ रंगरेज,

चुनरिया सतरंगी,

चुनरिया सतरंगी ॥


शिव पुराण में महाशिवरात्रि कथा

हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि मनाई जाती है, जिसे मासिक शिवरात्रि कहते हैं। फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाता है, जिसका विशेष महत्व है। महाशिवरात्रि का पर्व शिव भक्तों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

विनायक चतुर्थी के उपाय

हिंदू धर्म में विनायक चतुर्थी का व्रत विशेष महत्व रखता है। यह दिन भगवान गणेश की पूजा को समर्पित है। उन्हें विघ्नहर्ता और शुभ फल प्रदान करने वाला देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करने और कुछ उपाय अपनाने से जीवन की सभी बाधाएं दूर हो सकती हैं और मनचाही सफलता प्राप्त होती है।

मंगलवार को किन मंत्रों का जाप करें?

सनातन धर्म में मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित माना गया है। इस दिन विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से जातक की आर्थिक तंगी, शारीरिक पीड़ा और मानसिक तनाव समाप्त हो जाते हैं।

श्रीराम और होली की कथा

होली का त्योहार सिर्फ द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसका संबंध त्रेतायुग और भगवान श्रीराम से भी गहरा है। कहा जाता है कि त्रेतायुग में भी होली मनाई जाती थी, लेकिन तब इसका रूप आज से थोड़ा अलग था। ये सिर्फ रंगों का खेल नहीं था, बल्कि सामाजिक, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व से जुड़ा हुआ एक अनोखा त्योहार था।

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