नवीनतम लेख

कहन लागे मोहन मैया मैया (Kahan Lage Mohan Maiya Maiya)

कहन लागे मोहन मैया मैया,

पिता नंद महर सों बाबा बाबा,

और हलधर सों भैया,

कहन लागे मोहन मैया मैया,

कहन लागे मोहन मैया मैया,


ऊँचे चढ़ चढ़ कहती जशोदा,

लै लै नाम कन्हैया,

ले ले नाम कन्हैया,

कहन लागे मोहन मैया मैया,

कहन लागे मोहन मैया मैया,


दूर खेलन जन जाहूं लाल रे,

मारैगी काहूँ की गैयाँ,

मारेगी काहू की गैया,

कहन लागे मोहन मैया मैया,

कहन लागे मोहन मैया मैया,


गोपी ग्वाल करत कौतूहल घर घर बजति बधैयाँ,

घर घर बजती बधैया,

घर घर बजती बधैया,

कहन लागे मोहन मैया मैया,

कहन लागे मोहन मैया मैया,


मणि खमबन प्रति बिन बिलोकत

हो नाचत कुवर निज कन्हियाँ

कहन लागे मोहन मैया मैया,

कहन लागे मोहन मैया मैया,


सूरदास प्रभु तुम्हरे दरस कों चरननि की बलि जैयाँ,

चरननि की बलि जैया, बलि जैया

कहन लागे मोहन मैया मैया,

कहन लागे मोहन मैया मैया,

रूक्मिणी-श्रीकृष्ण के विवाह से जुड़ी कथा

पौष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रुक्मिणी अष्टमी के पर्व के रूप में मनाया जाता है, जो इस साल 22 दिसंबर को पड़ रही है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की पहली पत्नी देवी रुक्मिणी के जन्म की याद में मनाया जाता है।

तेरो लाल यशोदा छल गयो री(Tero Laal Yashoda Chhal Gayo Ri)

तेरो लाल यशोदा छल गयो री,
मेरो माखन चुराकर बदल गयो री ॥

थारो खूब सज्यो दरबार, म्हारा बालाजी सरकार (Tharo Khub Sajyo Darbar Mhara Balaji Sarkar)

थारो खूब सज्यो दरबार,
म्हारा बालाजी सरकार,

मेरा दिल अटका तेरी मूरत पे (Mera Dil Atka Teri Murat Pe)

मेरा दिल अटका तेरी मूरत पे,
मुझको तो किसी की खबर नही ॥

यह भी जाने