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कई जन्मों से बुला रही हूँ (Kai Janmo Se Bula Rahi Hun)

कई जन्मों से बुला रही हूँ,

कोई तो रिश्ता जरूर होगा,

नजरों से नजरें मिला भी ना पाए,

मेरी नजर का कुसूर होगा ।

कई जन्मो से बुला रही हूँ,

कोई तो रिश्ता जरूर होगा ॥


तुम ही तो मेरे मात पिता हो,

तुम ही तो मेरे बंधु सखा हो,

कितने नाते तुम संग जोडे,

कोई तो रिश्ता जरूर होगा ।

कई जन्मो से बुला रही हूँ,

कोई तो रिश्ता जरूर होगा ॥


तुम ही तो मेरी आत्मा हो,

तुम ही तो मेरे परमात्मा हो,

मुझी में रहकर मुझी से पर्दा,

पर्दा हटाना जरूर होगा ।

कई जन्मो से बुला रही हूँ,

कोई तो रिश्ता जरूर होगा ॥


कभी बुलाते हो वृंदावन में,

कभी बुलाते हो मधुबन में,

अपने घर में रोज बुलाते,

मेरे घर आना जरूर होगा ।

कई जन्मो से बुला रही हूँ,

कोई तो रिश्ता जरूर होगा ॥


आंखों में बस गई तस्वीर तेरी,

दिल मेरा बन गया जागीर तेरी,

दास की विनती तुम्हारे आगे,

दर्श दिखाना जरूर होगा ।

कई जन्मो से बुला रही हूँ,

कोई तो रिश्ता जरूर होगा ॥


कई जन्मों से बुला रही हूँ,

कोई तो रिश्ता जरूर होगा,

नजरों से नजरें मिला भी ना पाए,

मेरी नजर का कुसूर होगा ।

कई जन्मो से बुला रही हूँ,

कोई तो रिश्ता जरूर होगा ॥


मैं बेटा हूँ महाकाल का - भजन (Main Beta Hun Mahakal Ka)

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कन्हैया से नज़रे,
मिला के तो देखो,

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पापमोचनी एकादशी व्रत के नियम

पापमोचनी एकादशी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से व्यक्ति अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता है, और मोक्ष की प्राप्ति करता है।

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