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खाटू का राजा मेहर करो(Khatu Ka Raja Mehar Karo)

थासु विनती कराहाँ बारंबार,

सुनो जी सरकार,

खाटू का राजा मेहर करो ॥


था बिन नाथ अनाथ की जी,

कुण राखेलो टेक,

म्हासा थाके मोकला जी,

म्हासा थाके मोकला जी,

थासा तो म्हारे थे ही एक,

खाटू का राजा मेहर करो ।


थासु विनती कराहाँ बारंबार,

सुनो जी सरकार,

खाटू का राजा मेहर करो ॥


जाणु हूँ दरबार में थारे,

घणी लगी है भीड़,

थारे बिन किस विध मिटेगी,

थारे बिन किस विध मिटेगी,

भोले भगत की या पीर,

खाटू का राजा मेहर करो ।


थासु विनती कराहाँ बारंबार,

सुनो जी सरकार,

खाटू का राजा मेहर करो ॥


ज्यूँ-ज्यूँ बीते टेम हिये को,

छुट्यो जावे धीर,

उझलो आवे कालजो जी,

उझलो आवे कालजो जी,

नैणा सू टप-टप टपके नीर,

खाटू का राजा मेहर करो ।


थासु विनती कराहाँ बारंबार,

सुनो जी सरकार,

खाटू का राजा मेहर करो ॥


साथी म्हारे जिव का थे,

थासे छानी ना,

जान बूझ के मत तरसावो,

जान बूझ के मत तरसावो,

हिवड़े से लेवो लिपटाए,

खाटू का राजा मेहर करो ।


थासु विनती कराहाँ बारंबार,

सुनो जी सरकार,

खाटू का राजा मेहर करो ॥


ध्रुपद सुता की लज्जा राखी,

गज को काट्यो फंद,

सुणकर टेर देर मत किजो,

सुणकर टेर देर मत किजो,

श्याम बिहारी ब्रजचंद,

खाटू का राजा मेहर करो ।


थासु विनती कराहाँ बारंबार,

सुनो जी सरकार,

खाटू का राजा मेहर करो ॥


थासु विनती कराहाँ बारंबार,

सुनो जी सरकार,

खाटू का राजा मेहर करो ॥


कार्तिक पूर्णिमा पर राशि योग

कार्तिक पूर्णिमा में व्रत और पूजा-पाठ बहुत ही शुभ होते हैं। इस वर्ष यह व्रत 15 नवंबर 2024 को है। कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि में विशेष पूजा करने और स्नान-दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

ब्रज होली की पौराणिक कथा

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