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खाटू वाले श्याम प्यारे(Khatu Wale Shyam Pyare)

खाटू वाले श्याम प्यारे,

खूब कियो श्रृंगार,

रूप तेरो मन भावे,

मोरछड़ी तेरे हाथ में साजे,

लीले के असवार,

रूप तेरो मन भावे ॥


रंग सुनहरी केसरी बागा,

सुन्दर छवि प्यारी है,

अहिलावती के लाल जगत में,

तेरी शान निराली है,

जो कोई आवे गले लगावे,

देता सबको प्यार,

रूप तेरो मन भावे,

मोरछड़ी तेरे हाथ में साजे,

लीले के असवार,

रूप तेरो मन भावे ॥


जिसने दिल से याद किया प्रभु,

तू उसका ग़मख़ार बना,

हारे को तू देता सहारा,

तू यारो का यार बना,

रूप सलोना भोला मुखड़ा,

सबसे बड़ा दिलदार,

रूप तेरो मन भावे,

मोरछड़ी तेरे हाथ में साजे,

लीले के असवार,

रूप तेरो मन भावे ॥


धन्ना भगत का यार बना तू,

खेत में उसके काम किया,

नरसी भगत की हुंडी तारी,

सेठ सांवलिया नाम लिया,

ओ भगतों के प्यारे तुझको,

‘भोला’ रहा पुकार,

रूप तेरो मन भावे

मोरछड़ी तेरे हाथ में साजे,

लीले के असवार,

रूप तेरो मन भावे ॥


खाटू वाले श्याम प्यारे,

खूब कियो श्रृंगार,

रूप तेरो मन भावे,

मोरछड़ी तेरे हाथ में साजे,

लीले के असवार,

रूप तेरो मन भावे ॥

रक्षाबंधन क्यों मनाते हैं

रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक है। यह पर्व प्रतिवर्ष सावन माह की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन बहनें पूजा करके अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी सफलता एवं दीर्घायु की कामना करती हैं।

जरा चलके अयोध्या जी में देखों (Jara Chalke Ayodhya Ji Me Dekho)

जरा चल के अयोध्या जी में देखो,
राम सरयू नहाते मिलेंगे ॥

माँ दिल के इतने करीब है तू(Maa Dil Ke Itne Kareeb Hai Tu)

माँ दिल के इतने करीब है तू,
जिधर भी देखूं नज़र तू आए,

आये जी आये नवराते (Aaye Ji Aaye Navrate)

आये जी आये नवराते आये,
भक्तों को मैया दर्शन दिखाएं,

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