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क्या लेके आया जग में क्या लेके जाऐगा (Kya Leke Aaya Bande Kya Leke Jayega)

क्या लेके आया बन्दे,

क्या लेके जायेगा,

दो दिन की जिन्दगी है,

दो दिन का मेला ॥


दोहा – आया है सो जाएगा,

राजा रंक फकीर,

कोई सिंहासन चढ़ चले,

कोई बंधे जंजीर।


क्या लेके आया बन्दे,

क्या लेके जायेगा,

दो दिन की जिन्दगी है,

दो दिन का मेला ॥


ईस जगत सराऐ में,

मुसाफीर रहना दो दिन का,

क्यों विर्था करे गुमान,

मुरख इस धन और जोबन का,

बंद मुट्ठी आया जग में,

खाली हाथ जाएगा,

दो दिन की जिन्दगी है,

दो दिन का मेला ॥


वो कहाँ गए बलवान,

तीन बार धरती तोलणियाँ,

ज्यारी एडी पड़ती धाक,

नाही कोई शामें बोलणियाँ,

निर्भय डोलणियाँ वे तो,

गया रे अकेला,

दो दिन की जिन्दगी है,

दो दिन का मेला ॥


नहीं छोड़ सक्या कोई,

माया गिणी गिणाई ने,

गढ किला री निव छोड़ गया,

चिणी चिणाई ने,

चिणी रे चिणाई रह गई,

गया है अकेला,

दो दिन की जिन्दगी है,

दो दिन का मेला ॥


ईस काया का है भाग्य,

भाग्य बिन पाया नहीं जाता,

कहे ‘शर्मा’ बिना नसिब,

तोड़ फल खाया नहीं जाता,

भवसागर से तर ले बन्दे,

हरी गुण गायले,

दो दिन की जिन्दगी है,

दो दिन का मेला ॥


क्या लेके आया बन्दे,

क्या लेके जायेगा,

दो दिन की जिन्दगी है,

दो दिन का मेला ॥

Satyanarayan Bhagwan Ki Katha (सत्यनारायण कथा)

एक समय नैमिषीरण्य तीर्थ में शौनकादि 88 हजार ऋषियों ने श्री सूत जी से पूछा हे प्रभु! इस कलयुग में वेद-विद्या रहित मनुष्यों को प्रभु भक्ति किस प्रकार मिलेगी तथा उनका उद्धार कैसे होगा।

संसार के लोगों से आशा ना किया करना(Sansar Ke Logon Se Asha Na Kiya Karna)

संसार के लोगों से आशा ना किया करना,
जब कोई ना हो अपना,

कन्हैया ने जब पहली बार बजाई मुरली, सारी सृष्टि में आनंद की लहर दौड़ी

मुरलीधर, मुरली बजैया, बंसीधर, बंसी बजैया, बंसीवाला भगवान श्रीकृष्ण को इन नामों से भी जाना जाता है। इन नामों के होने की वजह है कि भगवान को बंसी यानी मुरली बहुत प्रिय है। श्रीकृष्ण मुरली बजाते भी उतना ही शानदार हैं।

जागरण की रात मैया, जागरण में आओ (Jagran Ki Raat Maiya Jagran Mein Aao)

जागरण की रात मैया,
जागरण में आओ,