नवीनतम लेख

श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने मे (shri ram janki bethe hai mere seene me)

श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने मे,

देख लो मेरे दिल के नगीने में II


– दोहा –

ना चलाओ बाण,

व्यंग के ऐ विभिषण,

ताना ना सह पाऊं,

क्यूँ तोड़ी है ये माला,

तुझे ए लंकापति बतलाऊं,

मुझमें भी है तुझमें भी है,

सब में है समझाऊँ,

ऐ लंकापति विभीषण, ले देख,

मैं तुझको आज दिखाऊं II


श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में,

देख लो मेरे दिल के नगीने में II


मुझको कीर्ति ना वैभव ना यश चाहिए,

राम के नाम का मुझ को रस चाहिए,

सुख मिले ऐसे अमृत को पीने में,

श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में II


– दोहा –

अनमोल कोई भी चीज,

मेरे काम की नहीं,,,

दिखती अगर उसमे छवि,

सिया राम की नहीं II



राम रसिया हूँ मैं, राम सुमिरण करूँ,

सिया राम का सदा ही मै चिंतन करूँ,

सच्चा आनंद है ऐसे जीने में,

श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में II


फाड़ सीना हैं, सब को ये दिखला दिया,

भक्ति में मस्ती है, सबको बतला दिया,

कोई मस्ती ना, सागर को मीने में,

श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में II


श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने मे,

देख लो मेरे दिल के नगीने में II

देव गुरु बृहस्पति की पूजा विधि?

हिंदू धर्म में प्रत्येक दिन किसी न किसी देवता को समर्पित है। उसी प्रकार, गुरुवार का दिन देवताओं के गुरु बृहस्पति देव का दिन होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से बृहस्पति की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

ढँक लै यशोदा नजर लग जाएगी (Dhank Lai Yashoda Najar Lag Jayegi)

ढँक लै यशोदा नजर लग जाएगी
कान्हा को तेरे नजर लग जाएगी ।

जय हों तेरी गणराज गजानन (Jai Ho Teri Ganraj Gajanan)

प्रथमें गौरा जी को वंदना,
द्वितीये आदि गणेश,

सफला एकादशी में पढ़ें तुलसी चालीसा

सनातन हिंदू धर्म में एकादशी काफ़ी महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह दिन पूरी तरह से श्री हरि की पूजा को समर्पित है। इस शुभ दिन पर भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और उनके लिए उपवास करते हैं।