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लेके पूजा की थाली

लेके पूजा की थाली, ज्योत मन की जगा ली

तेरी आरती उतारूँ, भोली माँ

तू जो दे-दे सहारा, सुख जीवन का सारा

तेरे चरणों पे वारूँ, भोली माँ

ओ, माँ, ओ, माँ


लेके पूजा की थाली, ज्योत मन की जगा ली

तेरी आरती उतारूँ, भोली माँ

तू जो दे-दे सहारा, सुख जीवन का सारा

तेरे चरणों पे वारूँ, भोली माँ

ओ, माँ, ओ, माँ


धूल तेरे चरणों की लेकर माथे तिलक लगाया।

हो, धूल तेरे चरणों की लेकर माथे तिलक लगाया।

यही कामना लेकर, मैय्या, द्वार तेरे मैं आया।

रहूँ मैं तेरा हो के, तेरी सेवा में खो के।

सारा जीवन गुज़ारूँ, भोली माँ।

तू जो दे-दे सहारा, सुख जीवन का सारा।

तेरे चरणों पे वारूँ, भोली माँ

ओ, माँ, ओ, माँ


सफल हुआ ये जनम कि मैं था जन्मों से कंगाल।

हो, सफल हुआ ये जनम कि मैं था जन्मों से कंगाल।

तूने भक्ति का धन दे के कर दिया मालामाल।

रहें जब तक ये प्राण, करूँ तेरा ही ध्यान।

नाम तेरा पुकारूँ, भोली माँ।

तू जो दे-दे सहारा, सुख जीवन का सारा।

तेरे चरणों पे वारूँ, भोली माँ

ओ, माँ, ओ, माँ


लेके पूजा की थाली, ज्योत मन की जगा ली।

तेरी आरती उतारूँ, भोली माँ।

तू जो दे-दे सहारा, सुख जीवन का सारा।

तेरे चरणों पे वारूँ, भोली माँ।

ओ, माँ, ओ, माँ

ओ, माँ, ओ, माँ


मेरे बालाजी सरकार मैं तेरा हो जाऊँ (Mere Balaji Sarkar Main Tera Ho Jaun)

शिव शंकर के अवतार,
मेरे बालाजी सरकार,

शाबर मंत्र क्या है?

भारतीय परंपरा में मनोकामना पूर्ति और विभिन्न लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मंत्रों का जाप एक प्राचीन प्रथा है। इन मंत्रों में से एक विशिष्ट श्रेणी, जिसे शाबर मंत्र कहा जाता है अपनी प्रभावशीलता और सरलता के लिए विशेष रूप से जानी जाती है।

मासिक दुर्गा अष्टमी के शुभ योग

मासिक दुर्गा अष्टमी का व्रत हर माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस साल मासिक दुर्गा अष्टमी का पहला व्रत 07 जनवरी 2025 को मनाई जाएगी।

कब है रुक्मिणी अष्टमी?

हिंदू धर्म में पौष मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रुक्मिणी अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्री कृष्ण की पत्नी देवी रुक्मिणी को समर्पित है, जिन्हें माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, रुक्मिणी अष्टमी पर ही द्वापर युग में विदर्भ के महाराज भीष्मक के यहां देवी रुक्मिणी जन्मी थीं।