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ममतामयी मां हे जगदम्बे (Mamatamayi Ma He Jagadambe)

ममतामयी मां हे जगदम्बे, मेरे घर भी आ जाओ।

(ममतामयी मां हे जगदम्बे, मेरे घर भी आ जाओ।)

भाग्य उदय हो जाएं हमारे, अपने दरस दिखा जाओ।

(ममतामयी मां हे जगदम्बे, मेरे घर भी आ जाओ।)


देर करो न आज भवानी, सफल करो माता जिंदगानी।

देर करो न आज भवानी, सफल करो माता जिंदगानी।

मेरे मन को निर्मल कर दो, भक्ति भाव जगा जाओ।

(ममतामयी मां हे जगदम्बे, मेरे घर भी आ जाओ।)


तरस रहे हैं नैन हमारे, बाठ निहारत सांझ सकारे।

तरस रहे हैं नैन हमारे, बाठ निहारत सांझ सकारे।

दीप द्वारे रख में बैठी, अपने ज्योत जला जाओ।

(ममतामयी मां हे जगदम्बे, मेरे घर भी आ जाओ।)


ये बेनाम शरण तेरी आई, हम पर भी मां हो करुणाई।

ये बेनाम शरण तेरी आई, हम पर भी मां हो करुणाई।

आँगन बिन माता लगे सूना, अमृत रस बरसा जाओ।

(ममतामयी मां हे जगदम्बे, मेरे घर भी आ जाओ।)

ममतामयी मां हे जगदम्बे, मेरे घर भी आ जाओ।

(ममतामयी मां हे जगदम्बे, मेरे घर भी आ जाओ।)

भाग्य उदय हो जाएं हमारे, अपने दरस दिखा जाओ।


एकादशी व्रत का महत्व

सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। बता दें कि साल में कुल 24 एकदशी पड़ती हैं। हर एकादशी का अपना अलग महत्व होता है। ग्यारहवीं तिथि को एकादशी कहते हैं।

शिव पंचाक्षर स्तोत्र मंत्र (Shiv Panchakshar Stotram )

॥ श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् ॥
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय,
भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय,
तस्मै न काराय नमः शिवाय ॥१॥ ॥ Shrishivpanchaksharastotram ॥
nagendraharay trilochanay,
bhasmangaragay maheshvaray .
nityay shuddhay digambaray,
tasmai na karay namah shivay .1.

दिल में श्री राम बसे हैं, संग माता जानकी(Dil Mein Shree Ram Base Hai Sang Mata Janki)

दिल में श्री राम बसे हैं,
संग माता जानकी,

रास कुन्जन में ठहरायो (Raas Kunjan Me Thahrayo)

रास कुन्जन में ठहरायो,
रास मधुबन में ठररायो,