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माँ अंजनी के लाल, थोड़ा ध्यान दीजिये(Maa Anjani Ke Lal Thoda Dhyan Dijiye)

माँ अंजनी के लाल,

थोड़ा ध्यान दीजिये,

दे ध्यान दीन दास का,

कल्याण कीजिये,

मां अंजनी के लाल,

थोड़ा ध्यान दीजिये ॥


रहते सदा आप है,

राम नाम में मगन,

कहते लगी है आपको,

श्री राम की लगन,

हमको भी भाव भक्ति का,

वरदान दीजिये,

दे ध्यान दीन दास का,

कल्याण कीजिये,

मां अंजनी के लाल,

थोड़ा ध्यान दीजिये ॥


पैरो में बांध घुँघरू,

करताल हाथ ले,

कीर्तन में आप नाचते,

भक्तो को साथ ले,

हमको एक बार,

अपने साथ लीजिये,

दे ध्यान दीन दास का,

कल्याण कीजिये,

मां अंजनी के लाल,

थोड़ा ध्यान दीजिये ॥


सेवा करूँगा आप का,

गुणगान करूँगा,

मैं आप के आराध्य का भी,

ध्यान धरूंगा,

‘नंदू’ करूँ भजन हमें,

स्वर ताल दीजिये,

दे ध्यान दीन दास का,

कल्याण कीजिये,

मां अंजनी के लाल,

थोड़ा ध्यान दीजिये ॥


माँ अंजनी के लाल,

थोड़ा ध्यान दीजिये,

दे ध्यान दीन दास का,

कल्याण कीजिये,

मां अंजनी के लाल,

थोड़ा ध्यान दीजिये ॥

श्री विश्वकर्मा चालीसा (Shri Vishwakarma Chalisa)

श्री विश्वकर्म प्रभु वन्दऊं, चरणकमल धरिध्यान।
श्री, शुभ, बल अरु शिल्पगुण, दीजै दया निधान॥

भगवान दत्तात्रेय की पौराणिक कथा

मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा के दिन भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश इन तीनों देवों के अंश माने जाने वाले भगवान दत्तात्रेय का जन्म हुआ था। भगवान दत्तात्रेय को गुरु और भगवान दोनों की उपाधि दी गई है।

मार्गशीर्ष की अशुभ तिथियां

धार्मिक मान्यता है मार्ग शीर्ष का माह भगवान श्री कृष्ण को अधिक प्रिय माना जाता है। यही वजह है कि इस दौरान तामसिक भोजन ना करने की सलाह भी धार्मिक ग्रंथो में दी जाती है।

निर्धन कहे धनवान सुखी (Nirdhan Kahe Dhanwan Sukhi)

दीन कहे धनवान सुखी
धनवान कहे सुख राजा को भारी ।

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