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महाकाल की शरण मे (Mahakal Ki Sharan Mein)

सबको मिला सहारा,

महाकाल की शरण में,

है काल भी तो हारा,

महाकाल की शरण मे,

सबको मिला सहारा,

महाकाल की शरण मे ॥


हो वक्त चाहे कैसा,

तुम हार नहीं जाना,

उज्जैन जाके दुख तुम,

महाकाल को सुनाना,

झुकता जहान सारा,

महाकाल की शरण मे,

सबको मिला सहारा,

महाकाल की शरण मे ॥


है मौत शिव की दासी,

भूत प्रेत शिव के चाकर,

चलता समय का पहिया,

आदेश शिव का पाकर,

किस्मत का चमके तारा,

महाकाल की शरण मे,

सबको मिला सहारा,

महाकाल की शरण मे ॥


शिप्रा के तट पर बैठे,

महाकाल मेरे राजा,

जीवन का सुख मिलेगा,

उज्जैन नगरी आजा,

रोशन शहर है जहां सारा,

महाकाल की शरण मे,

सबको मिला सहारा,

महाकाल की शरण मे ॥


है रूप जोगी वाला,

उनकी अजब है माया,

भक्तों का साथ शिव ने,

हर युग में है निभाया,

‘मंत्री’ को है सहारा,

महाकाल की शरण मे,

सबको मिला सहारा,

महाकाल की शरण मे ॥


सबको मिला सहारा,

महाकाल की शरण में,

है काल भी तो हारा,

महाकाल की शरण मे,

सबको मिला सहारा,

महाकाल की शरण मे ॥

मेरे ओ सांवरे, तूने क्या क्या नहीं किया (Mere O Sanware Tune Kya Kya Nahi Kiya)

मेरे ओ सांवरे,
तूने क्या क्या नहीं किया,

धन्वंतरि स्तोत्र (Dhanvantari Stotram)

ॐ शंखं चक्रं जलौकां दधदमृतघटं चारुदोर्भिश्चतुर्मिः।
सूक्ष्मस्वच्छातिहृद्यांशुक परिविलसन्मौलिमंभोजनेत्रम॥

भगवान इंद्र की पूजा विधि

सनातन धर्म में इंद्रदेव को देवों के राजा और आकाश, वर्षा, बिजली और युद्ध के देवता के रूप में पूजा जाता है। इंद्रदेव के आशीर्वाद से पृथ्वी पर वर्षा होती है, जो कृषि और जीवन के लिए आवश्यक है।

रुक्मिणी अष्टमी के दिन करें ये उपाय

पौष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रुक्मिणी अष्टमी के पर्व के रूप में मनाया जाता है। जो इस साल 22 दिसंबर को मनाया जा रहा है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की पहली पत्नी देवी रुक्मिणी के जन्म की याद में मनाया जाता है।

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