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मैया ओढ़ चुनरिया लाल, के बैठी कर सोलह श्रृंगार (Maiya Odh Chunariyan Lal Ke Bethi Kar Solha Shingar)

मैया ओढ़ चुनरिया लाल,

के बैठी कर सोलह श्रृंगार,

बड़ी प्यारी लागे,

बड़ी सोणी लागे,

बड़ी प्यारी लागे,

बड़ी सोणी लागे ॥


लाल चुनरियाँ चम चम चमके,

रोली को टीको दम दम दमके,

थारे हाथ मेहंदी लाल,

के बैठी कर सोलह श्रृंगार,

बड़ी प्यारी लागे,

बड़ी सोणी लागे,

बड़ी प्यारी लागे,

बड़ी सोणी लागे ॥


पगल्या री पायल छम छम छमके,

हाथां रो चुड़लो खन खन खनके,

थारे गल हीरा को हार,

के बैठी कर सोलह श्रृंगार,

बड़ी प्यारी लागे,

बड़ी सोणी लागे,

बड़ी प्यारी लागे,

बड़ी सोणी लागे ॥


खोल खजानो बैठी मेरी मईया,

जो चाहे सो मांग लो भईया,

म्हारी मईया लखदातार,

के बैठी कर सोलह श्रृंगार,

बड़ी प्यारी लागे,

बड़ी सोणी लागे,

बड़ी प्यारी लागे,

बड़ी सोणी लागे ॥


मैया ओढ़ चुनरिया लाल,

के बैठी कर सोलह श्रृंगार,

बड़ी प्यारी लागे,

बड़ी सोणी लागे,

बड़ी प्यारी लागे,

बड़ी सोणी लागे ॥

दुर्गा कवच पाठ

माता ललिता को दस महाविद्याओं की तीसरी महाविद्या माना जाता है। कहते हैं कि इस दिन देवी की आराधना करने से सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

भीष्म द्वादशी पूजा विधि

हिंदू धर्म में भीष्म द्वादशी का काफी महत्व है। यह माघ माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाई जाती है। इस साल रविवार, 9 फरवरी 2025 को भीष्म द्वादशी का व्रत रखा जाएगा।

गजानंद आँगन आया जी(Gajanand Aangan Aaya Ji )

म्हारा माँ गौरी का लाल,
गजानंद आंगन आया जी,

छठी देवी स्तोत्र (Chhathi Devi Stotram)

नमो देव्यै महादेव्यै सिद्ध्यै शान्त्यै नमो नम:।
शुभायै देवसेनायै षष्ठी देव्यै नमो नम: ।।