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मन के मंदिर में प्रभु को बसाना(Man Ke Mandir Mein Prabhu Ko Basana)

मन के मंदिर में प्रभु को बसाना,

बात हर एक के बस की नहीं है,

खेलना पड़ता है जिंदगी से,

भक्ति इतनी भी सस्ती नहीं है,

मन के मंदिर में प्रभू को बसाना,

बात हर एक के बस की नहीं है ॥


प्रेम मीरा ने मोहन से डाला,

उसको पीना पड़ा विष का प्याला,

जब तलक ममता है ज़िन्दगी से,

उसकी रहमत बरसती नहीं है,

मन के मंदिर में प्रभू को बसाना,

बात हर एक के बस की नहीं है ॥


तन पे संकट पड़े मन ये डोले,

लिपटे खम्बे से प्रहलाद बोले,

पतितपावन प्रभु के बराबर,

कोई दुनिया में हस्ती नहीं है,

मन के मंदिर में प्रभू को बसाना,

बात हर एक के बस की नहीं है ॥


संत कहते हैं नागिन है माया,

जिसने सारा जगत काट खाया,

कृष्ण का नाम है जिसके मन में,

उसको नागिन ये डसती नहीं है,

मन के मंदिर में प्रभू को बसाना,

बात हर एक के बस की नहीं है ॥


मन के मंदिर में प्रभु को बसाना,

बात हर एक के बस की नहीं है,

खेलना पड़ता है जिंदगी से,

भक्ति इतनी भी सस्ती नहीं है,

मन के मंदिर में प्रभू को बसाना,

बात हर एक के बस की नहीं है ॥


उनकी रेहमत का झूमर सजा है (Unki Rehmat Ka Jhoomar Saja Hai)

उनकी रेहमत का झूमर सजा है ।
मुरलीवाले की महफिल सजी है ॥

अनंग त्रयोदशी जोड़ों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

अनंग त्रयोदशी का व्रत हर साल मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। 2024 में यह व्रत 13 दिसंबर को पड़ेगा। इस दिन प्रदोष व्रत भी रखा जाएगा, जो मार्गशीर्ष महीने का आखिरी प्रदोष व्रत है।

जैसे होली में रंग, रंगो में होली (Jaise Holi Mein Rang Rango Mein Holi)

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शम्भु स्तुति - नमामि शम्भुं पुरुषं पुराणं (Shambhu Stuti - Namami Shambhu Purusham Puranam)

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नमामि सर्वज्ञमपारभावम् ।

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