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मिलता है सच्चा सुख केवल भगवान(Milta Hai Sachha Sukh Keval Bhagwan Tere Charno Me)

मिलता है सच्चा सुख केवल भगवान् तुम्हारे चरणों में ।

यह विनती है पल पल छिन की, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में ॥


चाहे बैरी सब संसार बने, चाहे जीवन मुझ पर भार बने ।

चाहे मौत गले का हार बने, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में ॥

॥ मिलता है सच्चा सुख केवल...॥


चाहे अग्नि में मुझे जलना हो, चाहे काटों पे मुझे चलना हो ।

चाहे छोडके देश निकलना हो, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में ॥

॥ मिलता है सच्चा सुख केवल...॥


चाहे संकट ने मुझे घेरा हो, चाहे चारों ओर अँधेरा हो ।

पर मन नहीं डग मग मेरा हो, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में ॥

॥ मिलता है सच्चा सुख केवल...॥


जिव्हा पर तेरा नाम रहे, तेरा ध्यान सुबह और शाम रहे ।

तेरी याद तो आठों याम रहे, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में ॥


मिलता है सच्चा सुख केवल भगवान् तुम्हारे चरणों में ।

यह विनती है पल पल छिन की, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में ॥

गजानंद वन्दन करते है (Gajanand Vandan Karte Hain)

गजानंद वंदन करते है ॥
आज सभा में स्वागत है,

कभी तो मेरे घर आना, मोरी शारदा भवानी (Kabhi To Mere Ghar Aana Mori Sharda Bhawani)

कभी तो मेरे घर आना,
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ज्वारे और अखंड ज्योत की परंपरा

तैत्तिरीय उपनिषद में अन्न को देवता कहा गया है- अन्नं ब्रह्मेति व्यजानत्। साथ ही अन्न की निंदा और अवमानना ​​का निषेध किया गया है- अन्नं न निन्द्यात् तद् व्रत। ऋग्वेद में अनेक अनाजों का वर्णन है I

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