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मुझे कैसी फिकर सांवरे साथ तेरा है गर सांवरे (Mujhe Kaisi Fikar Saware Sath Tera Hai Gar Saware)

मुझे कैसी फिकर सांवरे,

साथ तेरा है गर सांवरे,

मेरे होंठो पे रहती हंसी,

कोई गम ना बस है ख़ुशी,

मुझे कैसी फ़िक्र सांवरे,

साथ तेरा है गर सांवरे ॥


कितनी मुश्किल जो आए,

मैं तो खिलखिलाता रहूं,

तेरी किरपा से विपदाओं को,

दूर भगाता रहूं,

मुझे दुनिया की परवाह नहीं,

सिवा तेरे कोई चाह नहीं,

मुझे कैसी फ़िक्र सांवरे,

साथ तेरा है गर सांवरे ॥


मेरे संग में जो तू है,

मैं तेरे गीत गाता रहूं,

तेरी चौखट पे हरदम यूँ ही,

श्याम आता रहूं,

तूने थामा है दामन मेरा,

किया अहसान बाबा बड़ा,

मुझे कैसी फ़िक्र सांवरे,

साथ तेरा है गर सांवरे ॥


तेरी महिमा को कान्हा,

यूँ ही गुनगुनाता रहूं,

अपने हाथों से सांवरिये को,

रोज सजाता रहूं,

कभी ना बिछड़ूँ दर से तेरे,

‘हर्ष’ अरमान इतने मेरे,

मुझे कैसी फ़िक्र सांवरे,

साथ तेरा है गर सांवरे ॥


मुझे कैसी फिकर सांवरे,

साथ तेरा है गर सांवरे,

मेरे होंठो पे रहती हंसी,

कोई गम ना बस है ख़ुशी,

मुझे कैसी फ़िक्र सांवरे,

साथ तेरा है गर सांवरे ॥

हे गजानन पधारो (Hey Gajanan Padharo)

सिद्धिविनायक मंगलमूर्ति,
विघ्नहरण सुखपाल जी,

प्रदोष व्रत चालीसा

हर माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है, जो भगवान शिव की पूजा को समर्पित होता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार प्रदोष व्रत कन्याओं के लिए बेहद खास होता है, इस दिन भोलेनाथ की उपासना करने और व्रत रखने से मनचाहा वर पाने की कामना पूरी होती हैं।

कब है मकर संक्रांति

मकर संक्रांति हिन्दुओं का प्रमुख पर्व होता है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। तब ये पर्व मनाया जाता है। इस साल मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा।

बच्छ बारस शुभ मूहूर्त, पूजा विधि (Bachh Baras Shubh Muhrat, Puja Vidhi)

बच्छ बारस जिसे गोवत्स द्वादशी भी कहा जाता है। ये पर्व आगामी 28 अक्टूबर 2024 को मनाया जाएगा।