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सुन री यशोदा मैया - भजन (Sun Ri Yashoda Maiya)

सुन री यशोदा मैया,

तेरे नंदलाल रे,

कंकरिया से मटकी फोड़ी,

कंकरिया से मटकी फोड़ी,

मदन गोपाल रे,

कंकरिया से मटकी फोड़ी ॥


नानो कन्हैया तेरो बड़ा उत्पाती,

संग में ग्वाल बाल खुरापाती,

कर दे डगरिया पे,

कर दे डगरिया पे,

कर दे डगरिया पे चलना मोहाल रे,

कंकरिया से मटकी फोड़ी,

मदन गोपाल रे,

कंकरिया से मटकी फोड़ी ॥


छाछ दही माखन को बेरी,

दाड़ो ढीठ डाटे से ना डरे री,

ऊँचे छीके टांगी,

ऊँचे छीके टांगी,

ऊँचे छीके टांगी बहुत संभाल रे,

कंकरिया से मटकी फोड़ी,

मदन गोपाल रे,

कंकरिया से मटकी फोड़ी ॥


सुन री यशोदा मैया,

तेरे नंदलाल रे,

कंकरिया से मटकी फोड़ी,

कंकरिया से मटकी फोड़ी,

मदन गोपाल रे,

कंकरिया से मटकी फोड़ी ॥

मेरी मैया जी कर दो नज़र(Meri Maiya Ji Kardo Nazar)

मेरी मैया जी कर दो नज़र,
ज़िन्दगी मेरी जाए संवर,

ऊँचे ऊँचे पहाड़ो पे, मैया जी का बसेरा है (Unche Unche Pahado Pe Maiya Ji Ka Basera Hai)

ऊँचे ऊँचे पहाड़ो पे,
मैया जी का बसेरा है,

करवा चौथ व्रत-कथा की कहानी (Karva Chauth Vrat-katha Ki Kahani)

अतीत प्राचीन काल की बात है। एक बार पाण्डु पुत्र अर्जुन तब करने के लिए नीलगिरि पर्वत पर चले गए थे।