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मेरी मैया जी कर दो नज़र(Meri Maiya Ji Kardo Nazar)

मेरी मैया जी कर दो नज़र,

ज़िन्दगी मेरी जाए संवर,

मेरी मईया जी कर दो नज़र ॥


तेरे द्वारे हूँ कबसे खड़ी,

हाथ फूलों की लेकर लड़ी,

आस दिल में है दीदार की,

मैं हूँ प्यासी तेरे प्यार की,

देख दामन ये खाली मेरा,

मेरी मईया जी कर दो नज़र,

ज़िन्दगी मेरी जाए संवर,

मेरी मईया जी कर दो नज़र ॥


है महामाया माँ तार दे,

शारदे शारदे शारदे,

चूम लूँ मैया तेरे चरण,

सारे दुख दर्द हो जा हरण,

बस इतनी कृपा करदे माँ,

तेरी चौखट ही हो मेरा घर,

मेरी मईया जी कर दो नज़र,

ज़िन्दगी मेरी जाए संवर,

मेरी मईया जी कर दो नज़र ॥


तेरे दर की पुजारन रहूं,

मैं सदा ही सुहागन रहूं,

तेरा सिंगार करके सदा,

मांग सिंदूर से मैं भरूं,

माँ की भक्ति में बेनाम की,

ज़िन्दगी सारी जाए गुज़र,

मेरी मईया जी कर दो नज़र,

ज़िन्दगी मेरी जाए संवर,

मेरी मईया जी कर दो नज़र ॥


मेरी मैया जी कर दो नज़र,

ज़िन्दगी मेरी जाए संवर,

मेरी मईया जी कर दो नज़र ॥

नए ऑफिस की पूजा विधि

नया ऑफिस हर व्यवसाय और व्यक्ति के लिए एक बड़ा कदम होता है। जब कोई नया ऑफिस खोलता है, तो वह निश्चित रूप से चाहता है कि उसका व्यापार फले-फूले और उसे अधिक लाभ मिले। हिंदू धर्म में मान्यता है कि किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले भगवान का आशीर्वाद लेना शुभ होता है।

अन्नपूर्णा जयंती कब है

माता अन्नपूर्णा को हिंदू धर्म में अन्न और धन की देवी के रूप में स्थान प्राप्त है। माना जाता है कि मां अन्नपूर्णा के कृपा से ही पृथ्वी लोक के सभी जीवों को खाने के लिए भोजन या अन्न प्राप्त होता है।

उत्पन्ना एकादशी का चालीसा

उत्पन्ना एकादशी सनातन धर्म में एक महत्वपूर्ण तिथि है, जो भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। वैसे तो हर माह में दो एकादशी आती है, लेकिन उत्पन्ना एकादशी का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि इस दिन मां एकादशी का जन्म हुआ था।

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