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मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना (Mujhe Ras Agaya Hai Tere Dar Pe Sar Jhukana)

मुझे रास आ गया है,

तेरे दर पे सर झुकाना ।

तुझे मिल गया पुजारी,

मुझे मिल गया ठिकाना ॥


मुझे कौन जानता था,

तेरी बंदगी से पहले ।

तेरी याद ने बना दी,

मेरी ज़िन्दगी फ़साना ॥


मुझे इसका गम नहीं है,

की बदल गया ज़माना ।

मेरी ज़िन्दगी के मालिक,

कहीं तुम बदल न जाना ॥


यह सर वो सर नहीं है,

जिसे रख दूँ फिर उठा लूं ।

जब चढ़ गया चरण में,

आता नहीं उठाना ॥


तेरी सांवरी सी सुरत,

मेरे मन में बस गयी है ।

ऐ सांवरे सलोने,

अब और ना सताना ॥


दुनियां की खा के ठोकर,

मैं आया तेरे द्वारे ।

मेरे मुरली वाले मोहन,

अब और ना सताना ॥


मेरी आरजु यही है,

दम निकले तेरे दर पे ।

अभी सांस चल रही है,

कहीं तुम चले ना जाना ॥


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