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प्रभु रामचंद्र के दूता (Prabhu Ramachandra Ke Dootha)

प्रभु रामचंद्र के दूता,

हनुमंता आंजनेया ।

हे पवनपुत्र हनुमंता,

बलभीमा आंजनेया ।

बलभीमा आंजनेया,

बलभीमा आंजनेया ।


प्रभु रामचंद्र के दूता,

हनुमंता आंजनेया ।

हे पवनपुत्र हनुमंता,

बलभीमा आंजनेया ।

हे पवनपुत्र हनुमंता,

बलभीमा आंजनेया ।

बलभीमा आंजनेया,

बलभीमा आंजनेया ।


जय हो, जय हो,

जय हो, आंजनेया ।

जय हो, जय हो,

जय हो, आंजनेया ।

जय हो, आंजनेया

जय हो, आंजनेया


प्रभु रामचंद्र के दूता,

हनुमंता आंजनेया ।

प्रभु रामचंद्र के दूता,

हनुमंता आंजनेया ।

हे पवनपुत्र हनुमंता,

बलभीमा आंजनेया ।

हे पवनपुत्र हनुमंता,

बलभीमा आंजनेया ।

बलभीमा आंजनेया,

बलभीमा आंजनेया

कार्तिगाई दीपम उत्सव क्या है

कार्तिगाई दीपम उत्सव दक्षिण भारत के सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, जो भगवान कार्तिकेय को समर्पित है।

छोटी-छोटी कन्याएं(Maa Choti Choti Kanyaen)

देखी तेरे दरबार माँ,
छोटी-छोटी कन्याएं ।

वृश्चिक संक्रांति पर विशेष योग

हर संक्रांति में भगवान सूर्य की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दिन सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, इसलिए इसे संक्रांति कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन सूर्य भगवान की पूजा करने से धन और वैभव की प्राप्ति होती है

षटतिला एकादशी में तुलसी का महत्व

हिंदू धर्म में पूरे साल में आने वाली सभी 24 एकादशियों में से प्रत्येक को विशेष माना जाता है। उन्हीं में से एक षटतिला एकादशी है। माघ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ही षटतिला एकादशी कहते हैं।

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