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शंभू नाथ मेरे दीनानाथ: शिव भजन (Sambhu Nath Mere Dinanath)

शंभू नाथ मेरे दीनानाथ मेरे भोले नाथ मेरे आ जाओ,

भक्त तेरे पर विपदा भारी आके कष्ट मिटा जाओ,

ओम नमः शिवाय हरी ओम नमः शिवाय ॥


डम डम तेरा डमरू बाजे,

जिसपे सारी सृष्टि नाचे,

मनका पड़े जब जब डमरू पे ऐसी तान सुना जाओ,

ओम नमः शिवाय हरी ओम नमः शिवाय ॥


एक हाथ त्रिशूल विराजे,

गल सर्पों की माला साजे,

जटा में तेरी मां गंग विराजे अमृत पान करा जाओ,

ओम नमः शिवाय हरी ओम नमः शिवाय ॥


तेरे अघोरी तुझको पूजे,

संग तेरे शमशानों में झूमे

पूरे तन पर भस्म रमा के,

मस्तक पर त्रिकुंड सजा के,

सुंदर रूप दिखा जाओ,

ओम नमः शिवाय हरी ओम नमः शिवाय ॥

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी (Darshan Do Ghansyam Nath Mori Akhiyan Pyasi Re)

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी,
अँखियाँ प्यासी रे ।

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि

संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है, जिसे संकटों को दूर करने और सफलता प्राप्त करने के लिए रखा जाता है। भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी 2025 विशेष रूप से चैत्र मास में मनाई जाती है और इस दिन गणपति बप्पा की विधिपूर्वक पूजा की जाती है।

मेरी मां के बराबर कोई नहीं

ऊँचा है भवन, ऊँचा मंदिर
ऊँची है शान, मैया तेरी
चरणों में झुकें बादल भी तेरे
पर्वत पे लगे शैया तेरी

धनतेरस की पौराणिक कथा

धनतेरस का पर्व प्रति वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अपने हाथ में अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे।

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