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शेरावाली माँ, आए तेरे नवराते (Sherawali Ma Aaye Tere Navraate)

शेरावाली माँ,

आए तेरे नवराते,

तेरा दरबार सजा के,

तुझको भक्त बुलाते,

शेरावाली मां,

आए तेरे नवराते ॥


अंगना में देखो मैया,

रंगोली सजाई,

लाल गुलाबो वाली,

लड़िया लगाई,

माँ तेरे सेवक सारे,

आये रंग उड़ाते,

शेरावाली मां,

आये तेरे नवराते ॥


पाँव की पायल तेरी,

छम छम बाजे,

झूम के बहना सारी,

तेरे संग नाचे,

ढोली ढोल बजावे,

तेरी महिमा गाते,

शेरावाली मां,

आये तेरे नवराते ॥


नवरातों की लागे,

रात सुहानी,

गरबा लेकर घूमे,

अम्बे भवानी,

तेरे हम दर्शन करके,

मन ही मन हर्षाते,

शेरावाली मां,

आये तेरे नवराते ॥


हम बालक है तू,

माता हमारी,

चरणों में तेरे मैया,

जाए वारि वारि,

तेरी राहो में हम तो,

दिल अपना बिछाते,

शेरावाली मां,

आये तेरे नवराते ॥


शेरावाली माँ,

आए तेरे नवराते,

तेरा दरबार सजा के,

तुझको भक्त बुलाते,

शेरावाली मां,

आए तेरे नवराते ॥

तुम उठो सिया सिंगार करो, शिव धनुष राम ने तोड़ा है (Tum Utho Siya Singar Karo Shiv Dhanush Ram Ne Toda Hai)

तुम उठो सिया सिंगार करो,
शिव धनुष राम ने तोड़ा है,

बच्छ बारस शुभ मूहूर्त, पूजा विधि (Bachh Baras Shubh Muhrat, Puja Vidhi)

बच्छ बारस जिसे गोवत्स द्वादशी भी कहा जाता है। ये पर्व आगामी 28 अक्टूबर 2024 को मनाया जाएगा।

ये मैया मेरी है, सबसे बोल देंगे हम (Ye Maiya Meri Hai Sabse Bol Denge Hum)

ये मैया मेरी है,
सबसे बोल देंगे हम,

नर्मदा जयंती उपाय

गंगा नदी की तरह ही मां नर्मदा को भी बहुत ही पवित्र और पूजनीय माना गया है। भारत में छोटी-बड़ी 200 से अधिक नदियां हैं, जिसमें पांच बड़ी नदियों में नर्मदा भी एक है। इतना ही नहीं, मान्यता है कि नर्मदा के स्पर्श से ही पाप मिट जाते हैं। इसलिए, प्रतिवर्ष माघ महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को नर्मदा जयंती मनाई जाती है।

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